Yeh Ishq Hai | Aman Singh

Yeh Ishq Hai

सिगरेट का जलाना भूल भी जाऊँ, पर तुम्हारा यह कहना कि तुम्हारे दिल में मेरे लिए कुछ नहीं.. बहुत दर्द देता है।
पर क्या करूँ, प्यार जो करती हूँ तुमसे और प्यार में दर्द न हो तो प्यार ही कैसा?
सिगरेट तो मुझसे कब की अलग हो चुकी, वो तो बस दिखाने के लिए साथ रखती हूँ।
अब तो तुम्हारी आदत हो चली है मुझे..
तुम्हारा मुस्कुराना, गुस्सा होना, दूसरे के सामने हक़ जताना सब कुछ अच्छा लगता है मुझे..
वो शाम का वक़्त आज भी याद है मुझे जब हम भीड़ में कहीं गुम थे और तुम्हें देखते ही मैं खो गयी थी, तुम्हारी आँखों में..
तुम्हारा वो मुस्कुराकर देखना और मेरे दिल का मुझसे अलग हो जाना, दोनों जैसे एक साथ ही हुआ।
तुम्हारा यह कहना कि तुम मुझे प्यार नहीं करते, गलत नहीं है। बस समझ का फेर है।
कभी अकेले बैठकर सोचना, जवाब तुम्हें खुद मिल जायेगा.. कि मोहब्बत तो तुम्हें भी है, बस इज़हार-ए-इश्क़ से डरते हो तुम।
बीते वक़्त में जो भी हुआ उसे शायद भुलाया नहीं जा सकता लेकिन अगर रास्ते में गड्ढे मिलें तो मंजिल का साथ नहीं छोड़ते।
पता नहीं कैसे कहूँ, किन लफ़्ज़ों में समझाऊँ, कैसे अपने दिल का हाल तुम्हें दिखाऊँ।
तुम्हारे बिना न तो अब जीना मुमकिन है और न मरना आसान।
मैं औरों की तरह प्यार में जान नहीं दे सकती क्यों कि मैं तुम्हारे साथ जीना चाहती हूँ, तुम जिस भी सफ़र में हो, तुम्हारी हमसफ़र होना चाहती हूँ।
-अमन सिंह
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