Wo Milte Rahe | Aditi Chatterjee | Love A Cross Border

वो मिलते रहे | अदिति चटर्जी | लव अक्रॉस बोर्डेर

इश्क़ में कितने हसीं सौगात मिलते रहें,
टूट कर बाज़ुओं में वो मिलते रहें ।।

दस्तूर-ए-जहां ये सब भूल कर,
दिल-ए-आशियाँ में वो मिलते रहें ।

और दीदार-ए-सनम जो इबादत बना,
पीछे मस्जिद के वो मिलते रहें ।

इश्क़-ए-जूनून जो परवान होता चढ़ा,
लड़ के तूफ़ानों से वो मिलते रहें ।

और मेहबूब करके नक़ाब जो निकली अगर,
प्यार नज़रों नज़रों में मिलते रहें ।

रोका उनको जो मज़हब की बेड़ियों ने,
हरे नारंगी में रंग बदल वो मिलते रहें ।

और खिंच गई शरहदें जब पंजाब-लाहौर में,
देख कर चाँद को वो मिलते रहें ।

 

-अदिति चटर्जी

 

 

Aditi Chatterjee
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