Wo Kahte Hain Main Galat Hun | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ | अदिति चटर्जी

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ…
क्योंकि मैंने अपने इर्द- गिर्द
अपना ज़ोन बनाया,

जो उनके बनाये ज़ोन पर एक
काँच की पतली परत बना देता है
उनके रेंगते मोटे काले साँप सा
रूढ़ीवादी नियम मुँह खोले देखते तो हैं

मगर मुझे निगल नहीं पाते
वो ज़हरीले होते हैं
और डसते ही उम्र भर को रंग
बदल देते हैं

मुझे मेरा रंग पसंद है
मुझे पसंद आईना,
आईने से नज़रे मिलना
मैंने अपनी परत के कोनो को
मिट्टी से भर दिया है

उसकी मिट्टी में उगे पौधों पर
खिलते हैं फूल,
आते हैं भौंरें
मैंने भौंरों से दोस्ती कर ली है
बेज़ुबानो ने मेरे एहसासों
को सींचा है

मैं समझाना नहीं बस
सुनाना चाहती थी
भौंरें सुनते रहे, बेज़ुबाँ…

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ…
क्योंकि मैं डरती नहीं
ज़िन्दगी के जार से पर्चे निकाल कर
उसे चूम कर
इबादत करती हूँ

मिस्बाक सा उसे निगलकर
चेहरे पर नूर लाती हूँ
जबकि वो जार में हाथ डालने से
डरते हैं

मैं नहीं डरती लड़ने से, गिरने से,
हारने से, रोने से,
चीखने से, मुस्कुराने से,
घबराने से, शर्माने से,
इनकार से, इक़रार से,
धोखे से, प्यार से
मैं गले से लगाती हूँ

अपनी ज़िम्मेदारियाँ,
अपने अंजाम
मैं नहीं करती उम्मीद बबूल
बो कर आम खाने का
मैं खुद पे पर्दा नहीं डालती

मेरी आँखों में नंगी रूह
दिखती है
और नंगापन ख़ालिस होता है..

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ..
क्योंकि उन्होंने अपने हिसाब से
बनाई हैं ‘ग़लत’ की सुची
और उसका कैप्सूल बनाकर
गटकने को कह दिया सबको
मैंने इंकार किया है ऐसे
किसी भी कैप्सूल को लेने से
ये कड़वी होती हैं

अन्तर्मन उल्टियाँ करता है
उल्टियों से आती है बदबू
दिमाग को सुन्न कर देती है
फिर बस ज़िन्दा रह सकते है
उतना ही ज़िन्दा जितना हमारी
नज़रों में मोनालिसा
दिमाग को रोक दिया जाता है
लिओनार्डो बनने से पहले..

वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ..
और ये ‘ग़लत’ होना मुझे किसी भी
सही गलत के दायरे से परे रखता है..
वो कहते हैं मैं ग़लत हूँ…

-अदिति चटर्जी 

 

Aditi Chatterjee
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