Wo Cigarette | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem | #UnlockTheEmotion

वो सिगरेट | मुसाफिर तन्ज़ीम | #अनलॉकदइमोशन

एक सैलाब तलब का
एक ग़ुबार जुनून का
कुछ यादें उलझी सी
दो उँगलियों के दरमियान

काले चश्मे पे दिखती
जाने कितनी रंगीनियाँ
बेमतलब सी बेवफाई
हर पल

उड़ती जाती
छल्लों से बंधी हुई
कुछ बातें आ ही जाती कहने को
पर रह जातीं बस

होठों पे लदी हुई
जाने कितने शिक़वे गिले
धीरे धीरे सुलगते रहते
और हर शिकायत

बिखर सी जाती हो कर राख
आँखों के दायरे
चश्में के नीचे
अठखेलियाँ करते करते

सिमट कर मिल जाते
उस एहसास में
दिल डूबता जाता उस सुकूँ में
एक कश

बस एक कश में
डूबी थी इश्क़ की कहानी
हर कश एक कहानी कहता
एक कहानी भुलाता

कुछ बच भी जाता याद करने को
कुछ ऐसा जिसे याद नहीं करना होता
तो छोड़ के आखिरी कश
मिटा देते वो याद

पैरों के तले रखकर
और कुचलते रहते
जब तक उस याद की आग
ठण्डी नहीं हो जाती

फिर सुकून जब तक रहता
तब तक दूर रहती
और बेचैनी में फिर याद आ ही जाती
वो सिगरेट

 

 

-मुसाफिर तन्ज़ीम

 

Musafir Tanzeem
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