Walking Distance

“विक्की एक मिनट रुको तो सही…”, अंजली ने विकास को पीछे से आवाज देकर रोका लेकिन वह चाइना टाउन शॉप से निकलकर बाहर आ गया। चाइना टाउन कानपूर आई. आई. टी. की मशहूर नॉनवेज शॉप, जहाँ अक्सर अंजली, विकास और रौनक तीनो मिला करते थे। जब कभी लेक्चर से मन ऊब जाता तीनों वहीँ पर मिलते।

रौनक से नाराज़ हो विकास अभी शॉप से निकला ही था कि अंजली ने पीछे से आकार उसे हाँथ पकड़कर रोक लिया। न चाहकर भी विकास रुक गया। रुकता भी क्यूँ न, अंजली से प्यार करता था, भला उसे कैसे नाराज़ कर सकता था। अंजली ने उसे रोककर कहा, “ठीक है न यार, तू लेग पीस के साथ साथ कलेजी भी खा लेना…”
“तू न सुधर जा…” विकास ने लगभग चिढ़ते हुए कहा।
“अच्छा जैसे तू तो बहुत सुधरा हुआ है, चल…” अंजली ने किसी बच्चे की तरह उसे चिढाते हुए कहा।
दोनों हँसते हुए शॉप में वापस चले गए। दोनों पहुंचे ही थे कि उन्होंने देखा रौनक जल्दी जल्दी खाने में लगा है। उसने दोनों को आते देखा, दोनों उसे ही मुह फुलाए देख रहे थे। “अरे आ जा मेरी लाजो… तेरा ही तो इन्तजार था..” रौनक ने अंजली को आँख मारते हुए विकास से कहा।
“सुधर जा कमीने…” अंजली ने जवाब में आँख मारते हुए।

तीनों बैठकर खाने लगे कि तभी थोड़ी देर बाद शॉप के अन्दर का म्यूजिक अपने आप बदल गया। म्यूजिक के साथ ही साथ एक वेटर केक लेकर भी आ गया।
“हैप्पी बर्थडे टू यू…!! हैप्पी बर्थडे टू यू…!! हैप्पी बर्थडे डिअर लाजो…!! हैप्पी बर्थडे टू यू…!!” अंजली और रौनक ने एक साथ बोलकर विकास को चौका दिया। यह देख विकास हैरान हो गया और जल्द ही उसकी आंख में ख़ुशी के कुछ छीटे आ गए।

“अरे बस कर मेरी लाजो, पहले केक काट ले, बिदाई नहीं हो रही तेरी…” अंजली ने शरारती अंदाज में कहा।
विकास ने केक काटा, सबने खूब मस्ती की, नियम के अनुसार विकास को बर्थडे बोम्ब्स भी मिले। पार्टी के बाद तीनो साथ हॉस्टल के लिए लौट गए, तीनो का हॉस्टल अलग अलग लेकिन वाल्किंग डिस्टेंस पर ही था। “यार यह मेरा आखरी बर्थडे था, बहुत ही जल्द हम अलग हो जायेंगे।” विकास ने यूँ ही चलते हुए कहा।
अंजली और रौनक ने उसे गले लगा लिया, तीनो की आँखें नम हो गयीं। लेकिन तभी रौनक ने माहौल को हल्का बनाते हुए कहा, “अभी कहाँ इतनी जल्दी छोड़ने वाले हैं तुझे हम….”

कॉलेज के पहले सेमेस्टर से लेकर कॉलेज के आखरी साल तक तीनों साथ थे। हॉस्टल पहुँचने के बाद विकास ने अंजली और रौनक दोनों को एक थैंक यू मेसेज किया । अंजली ने जैसे ही मेसेज पढ़ा उसने विकास को फ़ोन किया।
“हाँ अंजली…” विकास ने फ़ोन उठाते हुए कहा।
“क्या यार सेंटी कर दिया तूने…” अंजली ने दूसरी तरफ से कहा।
“कुछ नहीं बस ऐसे ही…” विकास ने धीमी आवाज में कहा।
“क्या बस ऐसे ही, बोलो न..” अंजली ने जोर देते हुए कहा।
“रहने दो, तुम नहीं समझोगी…” विकास ने जवाब दिया।
“शायद… लेकिन तुम भी कभी नहीं समझोगे…” अंजली ने कहा, इस बार उसकी आवाज में शरारत नहीं थी। विकास ने कोई जवाब नहीं दिया। थोड़ी देर बाद अंजली ने खुद को सँभालते हुए कहा, “चलो कोई बात नहीं.. चल अभी सो जा कल लेक्चर से पहले मिलते हैं।”

फ़ोन कट चुका था लेकिन विकास की नज़र अभी भी अंजली की मुस्कुराती तस्वीर पर थी जो अभी भी लास्ट कॉल की हिस्ट्री में दिखा रही थी। रात बीती और सुबह आ गयी। एक नयी सुबह के साथ कॉलेज के बचे कुछ दिनों में से एक दिन और कम हो गया।

गुजरते वक़्त और लम्हों के साथ विकास की चिंता उसकी आँखों में उतरती जा रही थी। लेकिन वह अपने दिल की बात अंजली से कैसे कहे? मन अंजली उसकी सबसे अच्छी दोस्त है, लेकिन अपने दिल की बात उसे बताने के बाद कहीं वह नाराज़ हो गयी या उसने बात करनी बंद कर दी तो?

वह अंजली से जब भी बात करने का मन बनता है तभी न जाने कितने सवाल उसके दिल में आ जाते हैं और वह अपने बढ़ते क़दमों को हर बार रोक लेता या किसी और राह में मोड़ देते हैं।

कॉलेज कॉरिडोर में अगली सुबह अंजली का इन्तजार करते हुए विकास क्लास के लिए लेट हो रहा था। विकास ने अंजली को फ़ोन किया लेकिन उसने उठाया नहीं। फिर उसने रौनक को फ़ोन मिलाया, रौनक ने फ़ोन उठाकर कहा, उसकी तबियत ठीक न होने की वजह से वह कॉलेज नहीं आएगा। वह शाम को चाइना टाउन में ही मिलेगा।

जब दोनों ही नहीं आये तो विकास कॉरिडोर से क्लास की तरफ बढ़ गया। वह अभी दो कदम ही चला था कि अंजली ने उसे पीछे से टोकते हुए कहा, “ओह हेल्लो मिस्टर…” विकास ने पलट कर देखा तो देखता ही रह गया। अंजली उसकी पसंदीदा ड्रेस में थी, वही ड्रेस जिसे विकास ने उसे अंजली के पिछले जन्मदिन में तोहफे पर दिया था।

“क्या यार तुमसे इन्तजार भी नहीं होता?” अंजली ने इतराते हुए कहा।
विकास उसे देखा कहीं खो सा गया था। उसने कोई जवाब नहीं दिया। अंजली ने करीब आकार उसके चेहरे के सामने चुटकी बजाते हुए कहा, “क्या बात है? कहाँ खो गये? अच्छा यह तो बताओ मैं लग कैसी रही हूँ?”
“यह भी बताने की जरुरत है?” विकास ने जवाब दिया, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी।
“वैसे यह तो बताओ यह वही ड्रेस हैं न जो मैंने…” विकास आगे बोलता इससे पहले ही अंजली ने उसकी बात काट दी, “चलो अच्छा क्लास के लिए लेट नहीं हो रहा तुम्हे..”

उसने कहा और कहने के बाद क्लास की बजाये कैफेटेरिया की तरफ बढ़ गयी। विकास बिना कुछ कहे, बिना कुछ बोले उसके पीछे चला गया। विकास अंजली के पीछे जाते वक़्त बस यही सोच रहा था कि, “आज बहुत अच्छा मौका है, वह खुश भी बहुत है। और तो और आज तो मेरी ही दी हुयी ड्रेस पहनी है।”

वह अभी भी सोंच में डूबा था कि अंजली मुड़कर पीछे आई और विकास का हाँथ पकड़कर उसे अपने साथ खीचकर ले गयी। सब विकास की पसंद का ही था, पसंदीदा हॉट कॉफ़ी, कैफेटेरिया भी, पसंदीदा सीट, सुबह का पसंदीदा वक़्त और उसकी पसंदीदा दोस्त उसकी साथी, उसका प्यार अंजली…

वह उसे अपने दिल की बात बताने की सोच ही रहा था कि तभी विकास का फ़ोन बजा देखा तो रौनक था। विकास ने फ़ोन उठाया लेकिन उसके बोलने से पहले ही रौनक ने कहा, “यार कहाँ है तू? चल कोई नहीं जहाँ है जल्दी से आजा, तेरी मदद की जरूरत है, बस तू आजा जल्द से जल्द…” उसकी आवाज में घबराहट थी, विकास को कुछ समझ नहीं आया,जबतक वह कुछ कहता रौनक ने फ़ोन काट दिया।

रौनक से मिलने और उसकी बात सुनने के बाद विकास हैरान था, मानों उसके पैर के तले से जैसे जमीन खिसक गयी हो। और हो भी क्यूँ न, किसी के साथ भी ऐसा हो सकता है, आपके साथ मेरे…

रौनक अंजली से प्यार करता है, यह बात रौनक के मुंह से सुनकर विकास जैसे बेसुध हो गया था। अगर आपका जिगरी यार भी उसी लड़की से प्यार कर बैठे, जिसे आप प्यार करते हों, साथ ही आपको यह बात तब पता चले जब आप खुद अपने दिल की बात का इज़हार करने जा रहे हों?

विकास के लिए बेहद ही मुश्किल था, खुद को संभालना लेकिन बिना कुछ सोचे ही उसने रौनक से कहा, “यार यह तो बेहद ख़ुशी की बात है कि तुम अंजली को पसंद करते हो, साथ ही एक दूसरे को इतने वक़्त से जानते भी हो।” उसने इतना कहते हुए रौनक को गले लगा लिया और अपने आँखों से छलक जाने को तैयार अश्कों को पोंछ डाला।

“अरे यह सब तो ठीक है, पर उसे बतायेगा कब? अब तो कॉलेज भी ख़त्म होने को…” विकास ने अपने जज्बातों को अपने होंठों की हँसी में छुपाते हुए कहा।
“बिलकुल अभी, पर उसे तू बुलाएगा मेरे लिए, अब इतनी तो दोस्ती निभाएगा ही न….” रौनक ने खुश होते हुए कहा। विकास ने देर न करते हुए अंजली को फ़ोन किया और चाइना टाउन पर मिलने के लिए बुला लिया।

पूरे ठीक पंद्रह मिनट बाद तीनों एक दूसरे के सामने एक ही मेज़ के तीन तरफ थे। अंजली दोनों को ही हैरानी से देख रही थी। तीनों चुप थे। कौन शुरुआत करे? कौन बोले? खैर विकास ने चुप्पी तोड़ते हुए कह, “दरअसल रौनक तुमसे कुछ कहना चाहता है।” उसकी आवाज काँप रही थी।
“हाँ तो बोलो… तुम लोगों को कब से इजाजत की जरुरत पड़ गयी।” अंजली ने रौनक की तरफ देखते हुए कहा।

रौनक ने देर नहीं की और मेज़ पर रखे लेग पीस को उठाते हुए कहा, “यार तेरे से दोस्ती दोस्ती खेलते हुए कब प्यार हो गया, पता ही नहीं चला और देख अब तू मना मत करिए…” अंजली रौनक को बड़ी ही हैरानी से देख रही थी। थोड़ी देर बाद उसने विकास की तरफ नज़र की जो अंजली को ही देख रहा था। उसकी आँखों में कुछ जिसे अंजली ने पढने की कोशिश की लेकिन कुछ समझ नहीं पाई।

उसने रौनक की तरफ देखते हुए कह, “पर…”
उसकी बात को काटते हुए रौनक ने बोला, “पता है तू इस विकास को प्यार करती है और यह बेवकूफ तुझे.. यह बात मैं समझ गया तो तुम दोनों क्यूँ नहीं समझते और रही बात बोलने की तो कब कहोगे कॉलेज ख़त्म होने के बाद…” उसकी आवाज तेज़ हो चली थी।

अब विकास और अंजली को कुछ कहने की जरुरत नहीं थी।अंजली और विकास फिर गले मिल गए और रौनक पास बैठा उन्हें हँसते हुए देख रहा था। किसने अपनी दोस्ती निभाई और किसने अपने प्यार की कुर्बानी दी यह तय करना मैं आप पर छोड़ता हूँ क्यूँ कि प्यार और दोस्ती उस पल एक साथ थे।

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