वेटिंग | अमन सिंह | इन्तजार

अक्सर ही फेसबुक के सर्च बॉक्स में तुम्हारा नाम टाइप करके तुम्हे खोजने की कोशिश करता, तुम्हारे नाम से मिलते जुलते कई चेहरे नज़र आते पर तुम कही दिखाई नही देती। मुझे तो ये भी पता नही की तुम्हारी आई डी फेसबुक पर है भी या नही। मेरा चेहरा तो ठीक से याद भी नही होगा तुम्हे पर तुम्हारी आँखों की कशिश आज भी नहीं भुला हूँ मैं, तुम्हे तो ये भी याद नही की हम मिले भी हैं, हो भी कैसे ये बात तो सात साल पुरानी है। जब हमारी पहेली या यूँ कहूँ कि आखरी मुलाकात हुई थी।

(आखरी इसलिए क्यों के उसके बाद मिलने का मौका ही कहाँ मिला है हमें ) पिछले सात सालों में सिर्फ़ तुम्हारी आवाज ही सुनी है मैंने वो भी सिर्फ तीन या चार बार, शुक्र है इस मोबाइल का जिसकी वजह से कभी कभी हमारी मैसेज चैट हो भी जाती है लेकिन हर बार हम सिर्फ लड़ते हैं, बहस करते हैं और फिर सॉरी बोल कर सब कुछ भूल जाते हैं।

सब कुछ भूल जाते हैं, शायद ये तुम्हारे लिए है, मैं तो तुम्हे एक पल के लिए भी नही भूल पाया हूँ और शायद ना ही भूल पाउँगा, बीते सालो में तुम्हारा इन्तजार करते करते मेरा इस इन्तजार से ही एक गहरा रिश्ता हो गया है। मेरे दोस्त कहते हैं कि इन्तजार का फल मीठा होता है लेकिन मैं तुमसे पूंछता हूँ कि अगर किसी को मीठे से ही नफरत हो तो…??

तुम्हारे जवाब का इन्तजार रहेगा मुझे….!!

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13 thoughts on “वेटिंग | अमन सिंह | इन्तजार

  1. Nice story…..

    Intezaar ka fal……jaruri nhi hrbaar mitha hi nikle….mobabbat me aksar dil tut jaya karte h…nd mitha ….kadva ehsaas de jate h…

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