उम्र के दो पड़ाव | मंजरी सोनी

कल पार्क में उम्र के दो पड़ाव को झूला झूलते देखा,
नादानी अौर समझदारी को एक साथ देखा ।।

एक उलझनो में उलझा उदास,
दूसरा उत्साह से भरपूर बिंदास,
दोनो की मुस्कान में बहुत अंतर देखा,
खिलखिलाता बचपन बेसहारा बुढ़ापा साथ देखा ।।

एक जीवन की चुनौतियो से परेशान,
दूसरा उन चुनौतियो से अनजान,
दोनो के चेहरे के अलग अलग रंगो को देखा,
सपनो से लदी आँखे अौर ज़िम्मेदारियों से झुके कंधो को साथ देखा ।।

एक को झूले के सहारे थकान मिटाते,
दूसरे को उसके सहारे उड़ान भरते,
उन दो अनजान चेहरो में मैंने अपना बीता हुआ कल अौर आने वाले कल को देखा,
उम्र को माथे की चमक से सिलवटों में बदलते देखा ।।

 

-मंजरी सोनी

 

Manjari Soni
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