Tumhari Aankhein | Mid Night Diary | Mohit Chauhan

Tumhari Khoobsurati | Mohit Chauhan

जब भी चलता है तुम्हारी आँखों का काला जादू,
क्या बतायें तुम्हे ये दिल हो जाता है बेकाबू,

एक अलग सा नशा है इन आँखों मे तुम्हारी,
निहारते रहें इन नशीली आँखों को ये तमन्ना है हमारी,

तुम्हारी इन नशीली आँखों मे डूबने का मन करता है,
शराब का नशा भी इन आँखों के आगे फीका लगने लगता है,

उठे जो पलकें तुम्हारी तो सुबह हो जाती है,
झुके तो शाम ढ़ल जाती है
तुम्हारे होठों की ये मुस्कान,
मेरे दिल की धड़कन तेज़ कर जाती है,

खिलते हुए फूलों के जैसी है मुस्कान तुम्हारी,
लगता है डर हमे, कहीं सीने से निकल ना जाये जान हमारी

होंठ हैं तुम्हारे या है कोई रसीला जाम,
कब लगा पायेंगे इन्हे अपने होंठों से हम इसी ख्वाहिश मे गुज़रती है हर शाम,

तुम्हारे नर्म मुलायम होंठों को अपने होंठों पे सजाना है हमे,
अपनी मोहब्बत से तुम्हारी ज़िन्दगी को महकाना है हमे,

तुम्हारी गीली जुल्फें जब तुम्हारे रुखसर पे आती हैं,
मानो जैसे काली घटायें छा जाती हैं,
और इस दिल की सांसें सी थम जाती हैं,

पूनम के चाँद की तरह चमकता है चेहरा तुम्हारा,
जिसके दीदार को हर घड़ी तरसता है दिल हमारा,

क्यों तड़पाती हो अपनी अदाओं से तुम हमको,
क्या गुज़रती है इस दिल पे, इस बात का अन्दाजा भी है तुमको,

गुलाब की खुशबू की तरह महकता है जिस्म तुम्हारा,
रोज़ नींदों मे आने वाला हसीन ख्वाब हो तुम हमारा,

कुछ इस कदर तुमने अपने हुस्न का जादू बिखेर के रखा है,
कि हर किसी को अपना दीवाना बना के रखा है,

आज जाना तुम्हारे इस जिस्म पे तिल का मतलब,
नज़र ना लगे तुम्हे किसी की, इसलिये खुदा ने अपना पेहरेदार बैठा के रखा है,

अब तक सुनी थी सिर्फ मैने परियों की कहानी,
हकीकत मे होती हैं परियां, ये बात तुमसे मिलके है जानी।

 

 

-मोहित चौहान

 

 

Mohit Chauhan
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