Tum, Sirf Tum | Mid Night Diary | Saransh Shrivastva

तुम, सिर्फ तुम | सारांश श्रीवास्तव

न जाने कौन सा रिश्ता है
तुम्हारे और मेरे बीच

शायद

एक अनाम से रिश्ते के दरमियाँ
हम तुम सफ़र कर रहे हैं

कभी न ख़त्म होने वाला सफ़र
एक रिश्ता ऐसा बन चुका है

जिसे अब कोई शब्द समूह वर्णित ही नहीं कर सकता
एक अनाम रिश्ता है अब दरमियाँ

सोचता हूँ कभी कभी
कि
क्या नाम दूं इस अनाम से रिश्ते को….

प्रेम????
या फिर मेरी कल्पना????

फिर

एक लम्बी सी सांस लेने के बाद
मुस्कुरा देता हूँ

क्योंकि
मेरा
प्रेम भी तुम

और
मेरी
कल्पना भी तुम

सिर्फ तुम ही तो हो
सिर्फ और सिर्फ
तुम….

 

-सारांश

 

Saransh Shrivastava
Saransh Shrivastava
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