तुझपे मै क्या गीत लिखूं | कृष्ण कुमार पाण्डेय | मदर’स डे स्पेशल | #अनलॉकदइमोशन

हर शब्द तुझसे आता है,
हर शब्द तुझ तक जाता है,
शब्दों की पिरोकर माला, तुझको मै कैसे मीत लिखूं,
तुझपे मै क्या गीत लिखूं, तुझपे मै क्या गीत लिखूं,

रात भी तू है, तू ही सवेरा,
तू ही पतझड़, तू कोई पेड़ घनेरा,
सूरज सी चमक भी है तुझमे,
अमावस का है तुझमे अँधेरा
छेड़ के कुदरत को, मैं कैसे नयी रीत लिखूं
तुझपे मै क्या गीत लिखूं, तुझपे मै क्या गीत लिखूं,

नदियाँ सा तुझमे अल्हड़पन,
सागर सी शोख जवानी है,
आये बीच में कितनी बाधा,
पूरी होनी ये प्रेम कहानी है,
नदी और सागर से बढ़कर, अब मै क्या प्रीत लिखूं
तुझपे मै क्या गीत लिखूं, तुझपे मै क्या गीत लिखूं,

 

-कृष्ण कुमार पाण्डेय

 

Krishan Kumar Pandey
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