तोहफा | अमन सिंह | दिवाली – अ गिफ्ट ऑफ़ लव | #बेनामख़त

पिछले कई हफ्ते सिर्फ इसी जद्दोजहद में गुजार दिये कि आखिर तुम्हें तोहफ़े में क्या दूँ? देने को ऐसे ही कुछ भी कैसे दे दूं? तुम्हें बस यूँही कुछ खास या बेहद खास नहीं देना चाहता.. दिल के करीब, बेहद ही करीब कुछ ऐसा तुम्हारे लिये लेना चाहता था, पर कुछ मिला ही नहीं।

दीवाली में घर आने से पहले, अपने शहर, हमारे शहर आने से पहले झुमके लिये थे तुम्हारे लिये, इसलिये नहीं कि इन झुमकों के साथ तुम अच्छी या खूबसूरत लगोगी।

बल्कि जब इन झुमकों को दीवाली पर पहन कर तुम अपने ही बेबाक़ से उड़ते बालों को कान के पीछे ले जाकर कहीं छुपा लोगी, बस उसी वक़्त.. उसी एक लम्हें में तुम्हें देखना चाहता हूँ। बस उसी एक पल में शायद मेरी जान निकल जाने का इंतजाम हो जायेगा।

लेकिन सुबह बैग से समान निकलते हुये वो झुमके माँ को मिल गये और मैं उन्हें मना नहीं कर पाया। अब तुम्हें घर के पास की ही मार्किट से लेकर झुमके भेज रहा हूँ, पता नहीं ये तुम्हें पसंद आयेंगे या नहीं फिर भी.. ये तोहफ़ा कबूल कर लेना।

भले ही झुमके बदल गये थे लेकिन दिवाली की शाम, हाँ बस उसी एक लम्हें में जब तुम्हें देखा, सच कहूं… तो मेरी जान निकल जाने का इंतजाम हो गया था।

 

-अमन सिंह

 

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