तो लिखना | दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’ | #अनलॉकदइमोशन

तोड़ कर ये बंदिशे कभी इधर भी हो आना,तो लिखना ।
पत्ते सूखे और घर उजड़ा हुआ वो पाना, तो लिखना ।।

शौक़ उठते है पर चलते नहीं बुढ़ापे में
याद आ जाये गर जवानी का वो जमाना, तो लिखना ।।

दूरिया है बहुत, मजबूरी भी समझते है
फिर भी, कदम कभी मेरी गलियों में बढ़ाना,तो लिखना ।।

दम तोड़ते है वादें बख़त की बेरुखी से
अगर आशियां तुम भी संग किसी के बसाना, तो लिखना।।

ख़्वाबो को दफ़्न कर दिया ख़ाक से ताबूत में
मेरे सपनो में आकर हो कुछ तुमको बताना, तो लिखना।।

गीत, ग़ज़ल, नज़्म, बज़्म, शायरी का शौक़ छोड़ दिया
पर मेरे महबूब तुमको कभी कुछ भी हो सुनना, तो लिखना।।

 

 

-दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’

 

Divyanshu Kashyap TEJAS
Divyanshu Kashyap TEJAS

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