Thoda Aur Ruk Jaate | Mid Night Diary | Divyanshu Kashyap TEJAS

थोड़ा और रुक जाते | दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’

तू रोज कहती थी कि मेरा हक है तुझपे,
तू कभी ये जता देती तो रुक जाते।

ख़त तो तूने भी बहुत लिखे मुझको,
जुबॉ से कभी ये बता देती तो रुक जाते।

सजती थी रोज़ बज़्म तेरे कूचे में,
कभी मुझको भी अपना पता देती तो रुक जाते।

आफ़ताब समझती थी तू खुद को,
शोला कभी मुझको भी बना देती तो रुक जाते।

खूब बॉटी है मय तूने मेरे रकीबों को,
कभी मुझको भी बहका देती तो रुक जाते।

शम्मा तू भी काफ़ी मदहोश थी ‘तेजस’,
कभी मुझको भी दहका देती तो रुक जाते।

 

-दिव्यांशु कश्यप ‘तेजस’

 

Divyanshu Kashyap TEJAS
Divyanshu Kashyap ‘TEJAS’

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