तेरा चेहरा | मोहित चौहान

बेचैन करती इन रातों मे इस दिल को सुकूनियत देता है तेरा ये चेहरा,

सर्द सुबह की खिलखिलाती धूप की तरह खिलखिलाता है तेरा ये चेहरा,

घनघोर अंधेरे मे रोशिनी की पहली किरन है तेरा ये चेहरा,

खुदा का तराशा हुआ कोहीनूर हीरा है तेरा ये चेहरा,

ना रह पाये जिस से कोई भी नाराज़, उस मासूम बच्चे जैसा मासूम है तेरा ये चेहरा,

मायूसी मे भी चेहरे पे रौनक लादे ऐसा है हँसता हुआ तेरा ये चेहरा,

अपनी एक अदा से किसी को भी घायल कर दे, ऐसा का़तिलाना है तेरा ये चेहरा,

महकती हुई फिजा़ओं मे रंग भर दे, शर्माता हुआ तेरा ये चेहरा,

जब देखा था तुझे पहली बार मेरी नज़रों ने, मेरे दिल को घेर गया था तेरा ये चेहरा,

देख मेरी इन आँखों मे, दिखाई देगा तुझे सिर्फ तेरा ही ये चेहरा,

जब भी हारा हुआ महसूस करता हूँ, आगे बढ़ने का हौंसला देता है तेरा ये चेहरा,

मेरे ख्वाबों मे, मेरे ख्यालों मे, मेरे दिल मे, इस दिल की धड़कन मे, मेरी इन साँसों मे, हर जगह बसता है तेरा ये चेहरा,

समझ नहीं आता, समझ नहीं आता,
ये तेरा इश्क़ है या है तेरा हुस्न सुनहरा,

हाँ ये तेरा इश्क़ है, तेरा इश्क़ ही तो है, जिसका रंग मुझपर चढ़ा है गहरा।

 

-मोहित चौहान 

 

Mohit Chauhan
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