Tanhaai | Mid Night Diary | Aditi Chatterjee

तन्हाई | अदिति चटर्जी

है मेरी हमसफर, ये तन्हाई
अकेले में लिपटकर प्यार जताती है अपना
भिड़ में देखती रहती है मुझे दूर से
शायद दिलाना चाहती हो एहसास उसके साथ का।

मेरी आँखों में सिमटकर ढूँढ़ती रहती है
मेरे आस-पास के चेहरों में अपना सा अक्स कोई
खड़ी रहती है दरवाज़े के बहार इंतज़ार में
की गर जो निकले मेरे कमरे से ये मांस के लोथे तो वो आकर फूँक दे
मेरी रूह पे पड़े छाले और गालो पे पानी के सूखे दाग से दे सबुत अपने होने का।

छूपने की कोशिश करती है जब होती हूँ मैं किसी ट्रिप पे कुछ दोस्तों के साथ
जो देख लेते है मेरी आँखों में उसे
और जैसे ही खिड़की वाली सीट पे जा बैठती हूँ
वो गुनगुनाती है धीरे से कोई ब्लैक एंड वाइट फिल्म का गाना।

घुल जाती है मेरी रात 2 बजे वाली कॉफ़ी में
और धीरे धीरे खून में मिलकर दौड़ती है मेरी रगों में।

हर सुबह करती है एक नाकाम कोशिश उतर जाने की मुझपर से
मेरी बिस्तर की सिलवटों में
मगर खिड़की से पर्दा हटाते ही जब उसे मेरे कमरे में
मेरे साये के अलावा
कुछ नहीं दिखता,
वो लिपट जाती है फिर मुझसे अपना प्यार जताने को,
है मेरी हमसफर, ये तन्हाई।

 

 

-अदिति चटर्जी 

 

Aditi Chatterjee
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