Tag: Vinay Kumar

Aazadi | Mid Night Diary | Vinay Kumar
Poetry

आजादी | विनय कुमार

उसकी आजादी कैद हैसोच के तालो मे कहीशुरूआत भी करे तो क्यों करेउस चाबी को हाथ में उठाये क्यों कोई ये हमारा मान है या हैइसमें फर्क समझे क्यों कोईउसकी नजर झुके तो क्यों झुकेऐसाContinue reading

Ghazal ho Tum | Mid Night Diary | Vinay Kumar
Poetry

ग़ज़ल हो तुम | विनय कुमार

उस रोज जब उसने मझसे पूछा की अब क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए?जब मेरी ख़ामोशी मेरे दिल की धड़कनो से बात करती है जब मेरी खुली आँखे तुम्हारे धुंधलाते चेहरे का दीदार करती हैजब मेराContinue reading

Diwali Mnana Chahta Hun | Mid Night Diary | Vinay Kumar
Poetry

दिवाली मानना चाहता हूँ | विनय कुमार

क्यों तुम मुझे मैं जैसा हूँवैसा नहीं अपनातेक्यों तुम मुझेदूसरे लोगोँ सेतोलते होक्यों तुम मुझेवो बनाना चाहते हो जो मैं हु ही नहींमैं सावन की घटा नहीं तो क्या हुआमैं उस जंगल का छोटा साContinue reading

Aabaru | Mid Night Diary | Vinay Kumar
Short Stories

आबरू | विनय कुमार

पार्टी का माहौल था। केशव ने अपनी जन्मदिन की ख़ुशी में सभी दोस्तों को बुलाया था। ज़मीन पर बीछे दो गद्दे, उनपर बैठे 7 पियकड दोस्त उनमे से दो के हाथ में फ़िल्टर तक जलContinue reading