Tag: Vikram Mishra

Poetry

पुराणी यादें | विक्रम मिश्रा

जाने किस ओर हवाओं ने चलाया जादू, जाने कैसे इन निगाहों ने अनोखा देखा। आज फिर कैद हुई बज़्म इस जमाने की, आज अख़बार में यादों का झरोखा देखा।। हो के मायूस अध ठगी सेContinue reading

Abhi To Raat Baki Hai | Mid Night Diary | Vikram Mishra
Poetry

अभी तो रात बाकी है | विक्रम मिश्रा

हो गए मायूस ये बादल तो क्या गम है? अभी बरसात करने को कई हालात बाकी है। न पूंछो इस घडी तुम हाल हमसे ऐ मेरे साथी, अभी तो बात करने को ये सारी रातContinue reading