Tag: Veebha Parmar

Ek Din | Mid Night Diary | Veebha Parmar
Poetry

एक दिन | विभा परमार

तुम सिर्फ़ मुस्कुरा रहे हो और मैं, रिसती हूँ रोज़ तुझे याद नहीं पर मुझे याद है तेरा फरेब जिसके दाग़ मेरे अंतर्मन में छपे हुए है जिससे मैं और मेरी आत्मा क्षतिग्रस्त है लेकिनContinue reading

Bahroopiya Prem | Mid Night Diary | Veebha Parmar
Poetry

बहरूपिया प्रेम | विभा परमार

प्रेम बहरूपियापन से कम नहीं प्रेम के अनेकों रूप बेचैनी छटपटाहट आशा निराशा आकर्षण मौन खनकती हँसी जो बयां कर देती है सबकुछ तुम्हारा मेरे अंदर रोज़ बढ़ना और मेरे अंदर मेरा ही कम होContinue reading