Tag: Saransh Shrivastava

Chhota Sa Gharonda | Mid Night Diary | Saransh Shrivastava | #UnlockTheEmotion
Poetry

छोटा सा घरोंदा | सारांश श्रीवास्तव | #अनलॉकदइमोशन

छोटा सा घरोंदा एक होगा, जिसमे होगा तेरा मेरा फिर बसर…. चाहे कह ले कुछ भी फिर जमाना, होगा हमपर किसी का न असर…. छोटा सा घरोंदा एक होगा…. होंगी दुआओं की बारिश, ख़ुशी काContinue reading

Agar Tum Kaho | Mid Night Diary | Saransh Shrivastava | #UnlockTheEmotion
Poetry

अगर तुम कहो | सारांश श्रीवास्तव | #अनलॉकदइमोशन

छोड़कर सब प्रथाएं तुम तक आ जाऊंगा जाऊंगा न फिर कभी मैं अगर तुम कहो…. जानता हूँ कठिन है डगर ये बहुत चल दूं मैं अनंत तक अगर तुम कहो…. सुकून का जरिया भी तुम्हीContinue reading

Poetry

कौन हूँ मैं | सारांश श्रीवास्तव

कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं तो कह देना कोई ख़ास नही बस एक दोस्त है सीधा सादा सा जो रहता हर वक़्त मेरे साथ है और रहेगा हर वक़्त साथ मेरे मैं गलत रहूँContinue reading

Khamosh Lamhein | Mid Night Diary | Saransh Shrivastava
Poetry

खामोश लम्हें | साराँश श्रीवास्तव

पाकीज़गी से लबरेज़ वो वक़्त कितना खूबसूरत होगा ठिठुरती हुई ठण्ड में जब हम किसी दरिया किनारे ओस की बूंदों को आग से मिला देंगे और सुलगती हुई ठण्ड के साथ हम साथ में जिएContinue reading

Micro Tales

शर्दी की एक शाम | सारांश श्रीवास्तव

सर्द मौसम था और हवा भी चुभने लगी थी अब, हालाँकि ये चुभन अच्छी भी लगती है। कोहरा और कोहरे को चीरते हुए रोज़ तुमतक आने का सुकून भी कुछ और ही होता है। रोज़ सुबहContinue reading

Tum, Sirf Tum | Mid Night Diary | Saransh Shrivastva
Poetry

तुम, सिर्फ तुम | सारांश श्रीवास्तव

न जाने कौन सा रिश्ता है तुम्हारे और मेरे बीच शायद एक अनाम से रिश्ते के दरमियाँ हम तुम सफ़र कर रहे हैं कभी न ख़त्म होने वाला सफ़र एक रिश्ता ऐसा बन चुका हैContinue reading

Main, Tum Aur Ishq | Mid Night Diary | Saransh Shrivastva
Poetry

मैं, तुम और इश्क़ | सारांश श्रीवास्तव

मुझे बेवफा कहने वाले मेरे हमनफस तुमने तो वफ़ा की थी ना? चलो माना कि हम चले गए थे पर क्या तुमने मुझे कभी पुकारा? नहीं…. क्या तुमने कभी खुले आस्मां की आगोश में मुझसेContinue reading

Poetry

ख़त | सारांश श्रीवास्तव | लव लेटर

रात के खामोश सन्नाटो में जब लिखा था चाँद को तुम्हारी तरह, पहली बारिश की सौंधी सुगंध में जो थी महक तुम्हारी, और किसी दरिया पर चाँद की परछाई सच मनो जैसे हो तुम्हारी पायलContinue reading