Tag: Saransh Shrivastava

Micro Tales

Shardi Ki EK Shaam | Saransh Shrivastava

सर्द मौसम था और हवा भी चुभने लगी थी अब, हालाँकि ये चुभन अच्छी भी लगती है। कोहरा और कोहरे को चीरते हुए रोज़ तुमतक आने का सुकून भी कुछ और ही होता है। रोज़ सुबहContinue reading

Main, Tum Aur Ishq | Mid Night Diary | Saransh Shrivastva
Poetry

Main, Tum Aur Ishq | Saransh Shrivastava

मुझे बेवफा कहने वाले मेरे हमनफस तुमने तो वफ़ा की थी ना? चलो माना कि हम चले गए थे पर क्या तुमने मुझे कभी पुकारा? नहीं…. क्या तुमने कभी खुले आस्मां की आगोश में मुझसेContinue reading

Poetry

Khat | Saransh Shrivastava | Love Letter

रात के खामोश सन्नाटो में जब लिखा था चाँद को तुम्हारी तरह, पहली बारिश की सौंधी सुगंध में जो थी महक तुम्हारी, और किसी दरिया पर चाँद की परछाई सच मनो जैसे हो तुम्हारी पायलContinue reading