Tag: Restu Kumari

Poetry

लिखता हूँ | रेस्तु कुमारी | #बचपनबोलताहै

आज भी गुल्लक में कभी कभी खन्न-खना जाती है मेरी नानादानियाँ, उस सरगम से प्यारी अवाज सुन मुस्कुरा रहा हूँ मैं, सोचता हूँ कि कितना नादान था वो बचपन अब झूठ पे झूठ की ईमारतContinue reading

Aashna | Mid Night Diary | Reshtu Kumari
Poetry

आशना | रेष्टु कुमारी

हमारा नाम नहीं है, है पर कोई याद है, कोई था जो इस नाम से किसी को बुलाया करता था, कोई था जो इस नाम पर बेवजह मुस्कुराया करता था, लहजा याद है उसका, याद हैContinue reading