Tag: Prashant Sharma

Poetry

Koi Aur Hai | Prashant Sharma

हर दम जिस से मुआमला है मेरा, उसका सिलसिला कोई और है। हर्फ़ जैसा बिखरा पड़ा है वजूद मेरा, उसके जज़्बात कोई और है। मैं क़र्ज़ में दबा बेठा हु जिसके, उसका मोल कोई और है।Continue reading

Kisi Mod Par | Mid Night Diary | Prashant Sharma
Poetry

Kisi Mod Par | Prashant Sharma

मसला ये है की आशिकी में कुछ न कमाया हमने। ये जो दर्द में अमीरी है ये तो मिली है इनाम के तौर पर। जो तुमसे न मिली वो किसी और में ढूंढेंगे, लुटाएंगे अबContinue reading

Aaj Ke Baad | Mid Night Diary | Prashant Sharma
Poetry

Aaj Ke Baad | Prashant Sharma

आज के बाद, आज की ये बात फिर न हो। तेरी कल की बात में मेरा ज़िक्र न हो। मेरी आज की रात में तेरी फ़िक्र न हो। कुछ यूँ जुदा हो हम दोनो, तुमContinue reading