Tag: Prashant Sharma

Mohabbat Kiye Jaa Rahe Hain Sab | Mid Night Diary | Prashant Sharma
Poetry

मोहब्बत किए जा रहे हैं सब | प्रशान्त शर्मा 

मोहब्बत मोहब्बत किए जा रहे हैं सब। इलाज़ पता नही किसी को, बीमार हुए जा रहे हैं सब। कोई बाज़ार मालुम होता है ये, खैरात में दिल दिए जा रहे हैं सब। वो जो महसूस होताContinue reading

Mujhse Tum Naraaz Thi Kya | Mid Night Diary | Prashant Sharma
Poetry

मुझसे तुम नाराज़ थी क्या | प्रशान्त शर्मा

नाम मेरा, तुम्हारी आवाज़ थी क्या। चाँद कल लाल हुए बैठा था, मुझसे तुम नाराज़ थी क्या। बातें करते करते तुम चुप हो जाया करती थी। जो मुझसे नहीं कही कभी, वो बातें राज़ थी क्या।Continue reading

Poetry

कोई और है | प्रशान्त शर्मा

हर दम जिस से मुआमला है मेरा, उसका सिलसिला कोई और है। हर्फ़ जैसा बिखरा पड़ा है वजूद मेरा, उसके जज़्बात कोई और है। मैं क़र्ज़ में दबा बेठा हु जिसके, उसका मोल कोई और है।Continue reading

Koi Apna Nhi | Mid Night Diary | Prashant Sharma | Sad Poetry
Poetry

कोई अपना नहीं | प्रशान्त शर्मा | सैड पोएट्री

अब रातों को सो कर क्या करे हम। मेरा तो अपना कोई सपना ही नही। किसी का गम करे तो क्यों करे हम। मेरा तो यहाँ कोई अपना ही नही। भरी बज़्म को ही अपनाContinue reading

Kisi Mod Par | Mid Night Diary | Prashant Sharma
Poetry

किसी मोड़ पर | प्रशान्त शर्मा

मसला ये है की आशिकी में कुछ न कमाया हमने। ये जो दर्द में अमीरी है ये तो मिली है इनाम के तौर पर। जो तुमसे न मिली वो किसी और में ढूंढेंगे, लुटाएंगे अबContinue reading