Tag: Prashant Sharma

Poetry

कोई और है | प्रशान्त शर्मा

हर दम जिस से मुआमला है मेरा, उसका सिलसिला कोई और है। हर्फ़ जैसा बिखरा पड़ा है वजूद मेरा, उसके जज़्बात कोई और है। मैं क़र्ज़ में दबा बेठा हु जिसके, उसका मोल कोई और है।Continue reading

Koi Apna Nhi | Mid Night Diary | Prashant Sharma | Sad Poetry
Poetry

कोई अपना नहीं | प्रशान्त शर्मा | सैड पोएट्री

अब रातों को सो कर क्या करे हम। मेरा तो अपना कोई सपना ही नही। किसी का गम करे तो क्यों करे हम। मेरा तो यहाँ कोई अपना ही नही। भरी बज़्म को ही अपनाContinue reading

Kisi Mod Par | Mid Night Diary | Prashant Sharma
Poetry

किसी मोड़ पर | प्रशान्त शर्मा

मसला ये है की आशिकी में कुछ न कमाया हमने। ये जो दर्द में अमीरी है ये तो मिली है इनाम के तौर पर। जो तुमसे न मिली वो किसी और में ढूंढेंगे, लुटाएंगे अबContinue reading