Tag: Nikita Raj Purohit

Poetry

गुस्ताख़ मुरीद | निकिता राज पुरोहित

गुस्ताखी करने का इरादा न था हमारा, पर इस ज़बान ने सी कर इक लंबा अर्सा था गुज़ारा। अब जब सारा दर्द बिखेर ही दिया है, माफ़ कर जाने दो, कुछ इतना भी बुरा नहींContinue reading

Kitne Hi Dafe | Mid Night Diary | Nikita Raj Purohit | Faith In Love
Poetry

कितने ही दफ़े | निकिता राज पुरोहित | फेथ इन लव

कितनी ही दफ़े खुद को समझाया, तू अब नहीं पलटेगा। पर इस दिल ने भी वहीं पुराना दोहराया, वो धडकन है, ज़रूर लौटेगा। कितनी ही दफ़े अश्कों से झुटलाया, उनकी वजह तेरी कमी नहीं। परContinue reading