Tag: Musafir Tanzeem

Haar Kaise Maan Loon | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

हार कैसे मान लूँ | मुसाफिर तंज़ीम 

अभी गिरा ही तो हूँ टूटा तो नहीं हूँ इतनी जल्दी हार कैसे मान लूँ अभी तो लड़ना शुरू किया है लड़ाई देर तक चलेगी बदन से रिसते लहू और कुछ चोटों को अपना अंजामContinue reading

Wo Cigarette | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem | #UnlockTheEmotion
Poetry

वो सिगरेट | मुसाफिर तन्ज़ीम | #अनलॉकदइमोशन

एक सैलाब तलब का एक ग़ुबार जुनून का कुछ यादें उलझी सी दो उँगलियों के दरमियान काले चश्मे पे दिखती जाने कितनी रंगीनियाँ बेमतलब सी बेवफाई हर पल उड़ती जाती छल्लों से बंधी हुई कुछContinue reading

Bunkar Ka Khwaab | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem | #UnlockTheEmotion
Poetry

बुनकर का ख़्वाब | मुसाफिर तन्ज़ीम | #अनलॉकदइमोशन

इन सीलन भरी चार दीवारों के अन्दर एक सपना सो रहा है। वो सपना जिसमें ये दीवारें नहीं हैं एक हरा भरा मैदान है। जिसमें से एक नदी की छोटी से धारा निकल रही हैContinue reading

Online Wali Mohabbat | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

ऑनलाइन वाली मोहब्बत | मुसाफ़िर तंज़ीम

मैं टूटा हुआ था अंदर से जब किसी खास ने साथ छोड़ दिया था तन्हाईओं में कलम को साथी बनाया और लिखने लगा दर्द अपना कुछ दिन बाद ये दर्द पन्नो से होते हुए OnlineContinue reading

Kab Milega | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

कब मिलेगा | मुसाफिर तंज़ीम

दिल के हर कोने में ढूँढा मेरा यार कब मिलेगा लुटा के निकला था सब कुछ ये क़रार कब मिलेगा तलाश रहा हूँ जाने कहाँ कहाँ मेरे ग़मो का मुझको मज़ार कब मिलेगा हँस देतेContinue reading

Barf Se Lamhein | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

बर्फ से लम्हें | मुसाफिर तंज़ीम

बर्फ़ जैसे जमे हुए लम्हें मुलाकातों की गर्मी से पिघलते हैं और रूहानी सी भाप उड़ती है जो हवा में अपनी ठंडक से खूबसूरत सा एहसास भर देती है फिर अगली मुलाकात तक दोनों नContinue reading

Aadhuri Kahani Muqammal Ishq Ki | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

अधूरी कहानी मुक़म्मल इश्क़ की | मुसाफिर तंज़ीम

आज फिर से वो ख़्याल ज़िन्दा हो गया है जो कभी बो दिया था तुमने दिल में चुपके से मेरे बाल सहलाते हुए उस पर मुलाकातों और बातों की बौछार भी हो रही थी धीरेContinue reading

Dosti Aur Mazhab | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem | All Religions
Poetry

दोस्ती और मज़हब | मुसाफिर तंज़ीम | आल रिलिजनस आर वन

हाँ अभी भी थोड़ा सा बच्चा हूँ नहीं समझना चाहता हूँ ये धर्म जाति ऊंच नीच अमीर गरीब की बारीकियों को और मेरा दोस्त भी अभी बच्चा है घरवाले दोनो के कहते हैं अब तोContinue reading

Raavan | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

रावण | मुसाफिर तंज़ीम

जब तुम हँसते हो किसी सहकर्मी के स्तन या नितम्ब के बारे में छिछली सी बातें करके तब मुझे लगता है रावण अभी मरा नहीं है। बैठ गया है वो हमारे दिमाग में जब किसीContinue reading

Micro Tales

काम ख़तम | मुसाफिर तंज़ीम

रात के 2 बज रहे थे।चारों तरफ सन्नाटा और गलियों में सरकारी लाइटों का उजाला छाया हुआ था। सुमित के घर की बेल लगातार बज रही थी,ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ी मुसीबत में होContinue reading