Tag: Manjari Soni

Doosra Ishq | Mid Night Diary | Manjari Soni
Poetry

दूसरा इश्क़ | मंजरी सोनी

सुनो,मुझे दोबारा इश्क़ हो गया हैं हा,सही सुना तुमने के मुझे फिर ये हवा ने छुआ है। वो तुम्हारी ही तरह है, रात भर सुनता हैं,मुझे हाँ,मुझे सीने से लगा कर तो कभी उसके सीनेContinue reading

Halchal Almaari Ke Andar Ki | Bhavna Tirange Ki | Manjari Soni
Short Stories

हलचल अलमारी के अंदर की| भावना तिरंगे की | मंजरी सोनी

”सारा सामान निकाल कर जॉंच लो और जमा दो,ध्‍यान र‍हे कल सुबह कुछ परेशानी ना हो।” जैसे ही ये आवाज़ आई अलमारी के अंदर कुछ हलचल सी होने लगी। अलमारी में रखा तीरंगा मुस्‍कुराया औरContinue reading

Bachpan Jee Liya Karo | Manjari Soni | Happy Children's Day
#UnmuktIndia, Poetry

बचपन जी लिया करो | मंजरी सोनी | हैप्पी चिल्ड्रेन’स डे

वो जो बीत गया है बचपन तुम उसे बुला लिया करो, जहाँ कहीं मौका मिले तुम इसे जी लिया करो।। कभी यूँही दरवाज़े के पीछे छुपकर अपने दोस्तों को भौं कर दिया करो दफ़्तर में हींContinue reading

Samaaj Ke Thekedaar | Mid Night Diary | Manjari Soni
Poetry

समाज के थानेदार | मंजरी सोनी

लो आगये समाज के ठेकेदार बात करने मेरे हक़ की ।। अब ये करेंगे बात बेटी को बचाने की उनके ख़ुद के घर में बेटा हो इसलिए की इन्होंने पूजाएँ थी मारा था इन्होंने हीContinue reading

Intejar-e-Mulaqaat | Mid Night Diary | Manjari Soni
Micro Tales

इन्तजार-ए-मुलाक़ात | मंजरी सोनी

दबे पाव ख़ामोशी से ऊँची-नीची सीड़ियों से होते हुए ,तुम शहर के बाहर वाले टूटे-फूटे महल की छत पर आना ,मैं बना के लाऊँगी मैथि के पराँठे खटे मीठे निम्बू के अचार के साथ फिरContinue reading

Poetry

उम्र के दो पड़ाव | मंजरी सोनी

कल पार्क में उम्र के दो पड़ाव को झूला झूलते देखा, नादानी अौर समझदारी को एक साथ देखा ।। एक उलझनो में उलझा उदास, दूसरा उत्साह से भरपूर बिंदास, दोनो की मुस्कान में बहुत अंतरContinue reading

Jaruri Tha | Mid Night Diary | Manjari Soni
Love, Poetry

जरुरी था | मंजरी सोनी

अब जाना मैंने के जाना उसका ज़रूरी था। दर्दनाक हीं सही लेकिन उस हादसे का होना ज़रूरी था।।   हमारे सवरने के लिये उसका हमें तोड़ना ज़रूरी था। ख़ुद का हाथ थामने के लिये उसकाContinue reading