Tag: Love

Poetry

हर रात तन्हा गुजर जाती है | ‘उपासना पाण्डेय’ आकांक्षा

आज हर शाम तन्हा गुजर जाती है, किसी की याद में आंखे भर जाती है, बेचैनियों में काटती है मेरी राते, हर रात तन्हा गुजर जाती है, कोई शामिल नही मेरे दर्द में तेरे सिवा,Continue reading

Ekkees Din | Mid Night Diary | Gopal Yadav
Short Stories

इक्कीस दिन – एक मधुर पीड़ा | गोपाल यादव

सर्दी कुछ ख़ास नहीं थी फिर भी कॉलेज में सेमेस्टर एग्जाम के बाद हुए इस विंटर वेकेशन का एक दिन मैं अरविंद के साथ बिताना चाहता था। अरविंद जो कि एक शांत किस्म का इंसानContinue reading

Tu Pyaar Na Kar | Mid Night Diary | Divyanshu Kashyap TEJAS
Poetry

तू प्यार न कर | दिव्यांशू कश्यप ‘तेजस’

तू मेरी जान मुझको इतना प्यार न कर, नयनों के अनुबंधो से मुझ पर अधिकार न कर गिरा के बिजलियॉ हुस्न की मुझ पर ये अपनी तू सुकून ए दिल को मेरे गिरफ्तार न कर,Continue reading

Fark Padta Hai | Mid Night Diary | Aman Singh | #BenaamKhat
Benaam Khat

फर्क पड़ता है | अमन सिंह | #बेनामख़त

‘फ़र्क नहीं पड़ता है’ कहने से कितना फ़र्क पड़ता है, कभी सोचा है तुमने? हर रात जब बातों को टालकर तुम यूँ ही सोने चली जाती हो, तो कभी सोचा है तुमने या जानने कीContinue reading

Punar Janam | Mid Night Diary | Amrit | IshqDaari
Poetry

पुनर जन्म | अमृत | इश्क़दारी

गड्ढे से काम नही चलेगा, कुआँ खोदो, और उसमें गाड़ दो। नंगी आग पर, नंगा ही लिटा दो, और ठूँस दो मुँह में, उल्टी, धुआँ उगलती चिमनी। पेड़ से लटकाओगे फंदे में, तो जमीन तकContinue reading

Poetry

दीवारें | सुमित झा

मेरे कमरे की दीवारें मुझे जकरने लगी है। और अंधेरा मुझे डराने लगा है। बिस्तर की चादर मुझे बांधने लगी है। यहाँ का सन्नाटा अब चीख़ने लगा है। मेरी किताबें चिल्लाने लगी है। सिगरेट ख़ुदContinue reading

Aadhuri Kahani Muqammal Ishq Ki | Mid Night Diary | Musafir Tanzeem
Poetry

अधूरी कहानी मुक़म्मल इश्क़ की | मुसाफिर तंज़ीम

आज फिर से वो ख़्याल ज़िन्दा हो गया है जो कभी बो दिया था तुमने दिल में चुपके से मेरे बाल सहलाते हुए उस पर मुलाकातों और बातों की बौछार भी हो रही थी धीरेContinue reading

Main Tha Tum Thi | Mid Night Diary | Amrit
Poetry

मैं था तुम थी | अमृत

छटाँक भर लम्हो की दूरी पे, तुम थी, मुट्ठी भर कदमों की गिनती पे, मैं था, दूरियाँ बढ़ती गयी, लम्हे घटते गए, कदम चले, मुठ्ठियाँ बड़ी होती गयी। सफर की लहरों पे, तुम थी, रास्तेContinue reading

Poetry

तेरा चेहरा | मोहित चौहान

बेचैन करती इन रातों मे इस दिल को सुकूनियत देता है तेरा ये चेहरा, सर्द सुबह की खिलखिलाती धूप की तरह खिलखिलाता है तेरा ये चेहरा, घनघोर अंधेरे मे रोशिनी की पहली किरन है तेराContinue reading