Tag: Kumar Jitendra

Mera Dard | Mid Night Diary | Kumar Jitendra
Poetry

Mera Dard :: Kumar Jitendra

मुझे एक दर्द है की एक दर्द है मुझे उलझन बस इतनी सी है की क्या दर्द है मुझे ? जो अपना सा कोई दे गया क्या दर्द है वो ? क्या दवा है दर्दContinue reading

Love, Poetry

Shayad Pyaar

कुछ तो होगा तुझसे राबता (ज़ारा) वरना यू देख के चेहरा तेरा मैं मुस्कुरा गया कैसे ? कुछ तो तपिश रही होगी आँखों में तेरे बरना जाने पर मेरे आँखों में आंशु तेरे रह गयाContinue reading

Ajnabi | Mid Night Diary | Kumar Jitendra
Love, Poetry

Ajnabi

बस देख तेरी आँखो में हम, तुझको अपना पाए है, मन मस्त गगन की गलियों में, दो चार छंद ये गाए है। पर तुम ना हम को जाने है, ना तुमको हम जाने है, तुमContinue reading