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Love, Poetry

शायद प्यार | कुमार जीतेन्द्र

कुछ तो होगा तुझसे राबता (ज़ारा) वरना यू देख के चेहरा तेरा मैं मुस्कुरा गया कैसे ? कुछ तो तपिश रही होगी आँखों में तेरे बरना जाने पर मेरे आँखों में आंशु तेरे रह गयाContinue reading