Tag: Krishan Kumar Pandey

Poetry

तुझपे मै क्या गीत लिखूं | कृष्ण कुमार पाण्डेय | मदर’स डे स्पेशल | #अनलॉकदइमोशन

हर शब्द तुझसे आता है, हर शब्द तुझ तक जाता है, शब्दों की पिरोकर माला, तुझको मै कैसे मीत लिखूं, तुझपे मै क्या गीत लिखूं, तुझपे मै क्या गीत लिखूं, रात भी तू है, तूContinue reading

Maa Sach Much Maa Hoti Hai | Mid Night Diary | Krishan Kumar Pandey | Mother's Day Special
Poetry

माँ सचमुच माँ होती है | कृष्ण कुमार पाण्डेय | मदर’स डे स्पेशल | #अनलॉकदइमोशन

नौ महीने तक वो अपने अंदर, किसी को पाल सकती है, बच्चा छोटा हो या बड़ा, वो बखूबी सँभाल सकती है, देने को किसी को नया जीवन, वो दर्द अथाह सह सकती है, खुद पेContinue reading

Uljhane | Mid Night Diary | Krishan Kumar Pandey
Poetry

उलझने | कृष्ण कुमार पांडेय

जिंदगी की उलझनों से कुछ वक़्त मिला तो सोचा जिंदगी की उलझनों में क्या खोया क्या पाया है कोशिश की मुस्कुराने की हर ख़ुशी हर गम में कभी रुलाया है खुशियों ने तो कभी ग़मोंContinue reading