Tag: Jay Verma

Micro Tales

Ye Duniya Le Dekar Chalati Hai | Jay Verma

बात यदि प्रेम की हो तो सभी के हृदयों में गुदगुदी होने लगती है।यहाँ प्रेम से अभिप्राय प्रणय से अर्थात स्त्री-पुरुष के आकर्षण सम्बन्धी सम्बन्धों से है। जैसे ही प्रेम की बात उठती है हरContinue reading

Poetry

Main Vyapari Hun :: Jay Verma :: The Laughter Dose

हलवाई की दुकान पर जाके, मैंने कहा, हमें चाहिए छैना। हलवाई मुस्कुराया और बोला, आइये भाई साब! है न। एक है मलाई वाला और एक है सादा। स्वाद एक सा है, पर मलाई वाला हैContinue reading

Short Stories

Kuch Meri Bhi

मैं एक मूर्तिकार हूं। दिन भर पत्थर की शिलाओं पर खट् खट् खट् खट् खट्। यही मेरा काम है। मैं, तरह तरह के महापुरुषों देवों देवियों को गढ़ने वाला अपना भाग्य नहीं गढ़ पाता हूं।Continue reading

Dhundh | Mid Night Diary | Jay Verma
Poetry

Dhundh :: Jay Verma

लोगों को पसंद है धुंधलका, जिससे न पहचाने जा सकें चेहरे। छिपे रहें तथ्य, अस्पष्ट रहें विचार, और, चलता रहे यूं ही, ज्यों ही चलता है। एक पलायान, एक लुकाछिपी, चलती है सतत, इस स्पष्टताContinue reading

Poetry

Par Zindagi Chalti Rahi

घड़ी-घड़ी , क्षण- क्षण , कदम-कदम , पर छलती रही। खुद ही बनाया गूमड़, और उसे मलती रही। कई बार घेरे निराशा, और ये खलती रही। अब है खत्म कहानी या बाकी, असमंजस में डुलतीContinue reading