Tag: Ghazal

Rivaayat | Mid Night Diary | Abhinav Saxena
Ghazal

Rivaayat | Abhinav Saxena

मिरी खुद से अदावत हो रही है मुझे ये किसकी आदत हो रही है। हमीं से खुद नहीं मिल पा रहे हम किसी को तो शिकायत हो रही है। घने पेड़ों के साये हैं बहुतContinue reading

Ghazal

Khone Ka Dar | Divyanshu Kashyap ‘Tejas’

तुझे पाने की चाहत नहीं मुझको, पर तुझे खोने का डर लगता है। रिश्ता भी कुछ खास नहीं तुझसे, पर ये डर मुझको हर पहर लगता है।। खानाबदोश जिन्दगी थी मेरी अब से पहले परContinue reading