Tag: Dinesh Gupta

Jab Se Meri In Aankhon Par Teri Julfon Ka Saya Ho Gaya Hai | Mid Night Diary | DInesh Gupta
Poetry

जब से मेरी इन आँखों पर तेरी जुल्फों का साया हो गया है | दिनेश गुप्ता

जब से मेरी इन आँखों पर तेरी जुल्फों का साया हो गया है प्यार-इश्क-मुहब्बत में कितना वक्त जाया हो गया है एक सख्श आज भी दिल के उतना ही करीब है बेशक ज़माने को लगताContinue reading

Hum Jo Honthon Par Itni Muskaan Liye Baithe Hain | Mid Night Diary | DInesh Gupta | #UnlockTheEmotion
Poetry

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं | दिनेश गुप्ता | #अनलॉकदइमोशन

हम जो होठों पर इतनी मुस्कान लिए बैठे हैं सीने में ग़मों का तूफान लिए बैठे हैं आप जो हमसे इतना अनजान हुए बैठे हैं आप तो हमारी जान ही लिए बैठे हैं एक वोContinue reading

Ishq Me Aksar Kitne Ehsaan Reh Jate Hain | Mid Night Diary | DInesh Gupta | #UnlockTheEmotion
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इश्क में अक्सर कितने एहसान रह जाते हैं | दिनेश गुप्ता | #अनलॉकदइमोशन

जख़्म भर जाते हैं चोट के निशान रह जाते हैं इश्क में अक्सर कितने अहसान रह जाते हैं बेशक जान लेता है सारा जमाना इश्क में मगर अक्सर हम खुद से ही अनजान रह जातेContinue reading

Darmiyaan | Mid Night Diary | Dinesh Gupta
Poetry

दरमियान | दिनेश गुप्ता

तेरे सुर्ख होंठो की नरमियाँ याद है तेरी सर्द आहों की गरमियाँ याद है कुछ भी तो नहीं भूले हम आज भी जो कुछ भी था दरमियाँ याद है…. याद है बिन तेरे वो शहरContinue reading

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दिया अंतिम आस का | दिनेश गुप्ता

दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का वक्त नहीं अब, हास-परिहास-उपहास का कदम बढाकर मंजिल छू लूँ, हाथ उठाकर आसमाँ पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का बस एक बार उठ जाऊँ, उठकर संभलContinue reading

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जब भी तुम याद आती हो | दिनेश गुप्ता

उम्र के हर पड़ाव में, जीवन के हर बदलाव में रात में कभी दिन में, धूप में कभी छाँव में जज़्बातों के दबाव में, भावनाओं के बहाव में ज़ख्मों पर मरहमों में, मरहमों पर फिरContinue reading

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एह्सास | दिनेश गुप्ता

खिल उठी है कलियाँ सारी, चहक रहा आँगन-आँगन बहकी हुई है सारी फिज़ायें, महक रहा गुलशन-गुलशन रोम-रोम मदहोश हुआ, नाच रही धड़कन-धड़कन मौसम नया, रुत नयी, हवाओं में बात कुछ खास है तू सचमुच आईContinue reading

Chand Lafzon Me | Mid Night Diary | Dinesh Gupta
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चंद लफ़्ज़ों में | दिनेश गुप्ता

शब्द नए चुनकर गीत वही हर बार लिखूँ मैं उन दो आँखों में अपना सारा संसार लिखूँ मैं विरह की वेदना लिखूँ या मिलन की झंकार लिखूँ मैं कैसे चंद लफ्ज़ों में सारा प्यार लिखूँContinue reading