Tag: Dharmendra Singh

Poetry

मैं तकलीफें सह लूंगा | धर्मेंद्र सिंह | #अनलॉकदइमोशन

अंबर से बदरी छट जाये, फूलों की रंगत उड़ जाये जो रात न तन्हा कट पाये, पास मेरे आ जाना तुम बिस्तर पे तुम सो जाना, मैं सोफे पे ही रह लूंगा तुम आराम कोContinue reading

Wo Ladki | Mid Night Diary | Dharmendra Singh | #UnlockTheEmotion
Poetry

वो लड़की | धर्मेंद्र सिंह | #अनलॉकदइमोशन

वो पास वाले मेरे…घर में ही रहती थी न बोलती जुबां से, वो नैनों से कहती थी फिर एक दिन वो चली गई, मुझे बिन बताये हम घूमते थे फ़कीर से…दौलत लुटाये उसके जाने केContinue reading

Poetry

कल, सिगरेट और तुम | धर्मेंद्र सिंह

कल मेरी सिगरेट शायद आखिरी बार जलेगी फ़िक्र को धुँए में उड़ाने की नाकाम कोशिश मैं कल फिर से करूँगा शायद तुमसे कुछ वादे करके मैं कल फिर भूल जाऊँगा शायद मैं वो झूठी कसमेंContinue reading

Main Aaya Tere Gaon Me Savan Ke Sath | Mid Night Diary | Dharmendra Singh
Love, Poetry

मैं आया तेरे गाँव में सावन के साथ | धर्मेंद्र सिंह

मैं आया तेरे गांव में सावन के साथ बागों में फूल खिले थे, पर इक कली मुरझाई देख मुझे वो लपक के दौड़ी आई बर्षों बाद आया तू पत्थर दिल सिपाही कह के लगी गलेContinue reading

Poetry

मानव नहीं मैं पेड़ हूँ | धर्मेंद्र सिंह

मानव नहीं ‘मैं पेड़ हूँ’ अभी बूढ़ा नहीं, अधेड़ हूँ। अभी तो बौर आया है, अभी तो सावन आया है, अरे! ये क्या? कुछ लोग आए हैं, कुछ औजार लाए हैं, मालिक भी साथ आयाContinue reading