Tag: Dharmendra Singh

Poetry

Kal, Cigarette Aur Tum | Dharmendra Singh

कल मेरी सिगरेट शायद आखिरी बार जलेगी फ़िक्र को धुँए में उड़ाने की नाकाम कोशिश मैं कल फिर से करूँगा शायद तुमसे कुछ वादे करके मैं कल फिर भूल जाऊँगा शायद मैं वो झूठी कसमेंContinue reading

Main Aaya Tere Gaon Me Savan Ke Sath | Mid Night Diary | Dharmendra Singh
Love, Poetry

Main Aaya Tere Gaon Me Savan Ke Sath

मैं आया तेरे गांव में सावन के साथ बागों में फूल खिले थे, पर इक कली मुरझाई देख मुझे वो लपक के दौड़ी आई बर्षों बाद आया तू पत्थर दिल सिपाही कह के लगी गलेContinue reading

Poetry

Manav Nahin Main Ped Hun

मानव नहीं ‘मैं पेड़ हूँ’ अभी बूढ़ा नहीं, अधेड़ हूँ। अभी तो बौर आया है, अभी तो सावन आया है, अरे! ये क्या? कुछ लोग आए हैं, कुछ औजार लाए हैं, मालिक भी साथ आयाContinue reading