Tag: Deepti Pathak

Poetry

माँ का साया | दीप्ति पाठक | मदर’स डे स्पेशल | #अनलॉकदइमोशन

वो ज़िन्दगी की तेज धूप में जो आँचल हमेशा मुझपर लहराया है, लगता है मेरी माँ का साया है, वो चांदनी हर रात में यूँ जो चाँद मुझे देख मुस्कुराया है,लगता है मेरी माँ काContinue reading

Jab Kaha Tha | Mid Night Diary | Deepti Pathak | #UnlockTheEmotion
Poetry

जब कहा था | दीप्ति पाठक | #अनलॉकदइमोशन

वो जब कहा था तुमने कि वक़्त के साथ हर किरदार बदलेगा, मैं भी बदलूंगा ,कुछ तुम भी बदल जाना, पर क्यों नही बताया था तुमने के किरदार के साथ मेरा हकदार भी बदलेगा, तुमContinue reading

Kabhi Aisa Hoga Nahi | Mid Night Diary | Deepti Pathak | #UnlockTheEmotion
Poetry

कभी ऐसा होगा नहीं | दीप्ति पाठक | #अनलॉकदइमोशन

वैसे तो अब कभी ऐसा होगा नही, की फिर से हमारे रास्ते कभी टकराये , पर फिर भी किसी शाम अगर ऐसा हो भी जाता हैं तो, नज़रें मिलाने की गलती ना करना। आंखों सेContinue reading

Short Stories

गड्तंत्र की ज़मीनी हक़ीक़त | दीप्ति पाठक | गड़तंत्र दिवस विशेष

आज 26 जनवरी ,गणतंत्र दिवस की भोर न जाने मेरे मस्तिष्क पटल पर कितनी भूली बिसरी यादों का सैलाब ले आयी हो।वो पास के ही किसी स्कूल से आते देशभक्ति के गानों की आवाज़ों सेContinue reading

Ek Cup Chai | Mid Night Diary | Deepti Pathak | #UnmuktIndia
#OneGoOneImpact, #UnmuktIndia, Short Stories

एक कप चाय | दीप्ति पाठक | #उन्मुक्तइंडिया

हर शाम office के बाद सामने की चाय की थड़ी पर बैठ कर चाय पीने की जैसे कोई लत सी लग गयी थी… मेरे हर दिन का हिस्सा सा हो चला था ये हर शामContinue reading

Khushi Nhi Milti | Mid Night Diary | Deepti Pathak | Happy Diwali
Poetry

ख़ुशी नहीं मिलती | दीप्ति पाठक | हैप्पी दिवाली

जो मिलती थी उस दीवाली, आज वो खुशी नहीं मिलती। जब माँ अपने बचाये पैसों से कपड़े दिलाती थी और बाबा लेकर लोन घर में स्कूटर लाते थे। फिर उन कपड़ों को पहन इतराना औरContinue reading

Poetry

अजनबी | दीप्ति पाठक

अजनबियों की महफ़िल में, फिर से अजनबीयों सा नज़र आ तो सही ।। अधूरा ही सही वो इश्क़ फरमा तो सही।। जीने दे वो लम्हें फिर से, जो रह गए थे पिछले इश्क़ में।। मेरीContinue reading