Tag: Benaam Khat

Khair Chhod Do | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat

ख़ैर, छोड़ दो | अमन सिंह

कितना आसान है यह कह देना कि ‘छोड़ दो’ शायद यह दुनिया सा सबसे आसान शब्द होगा लेकिन इसे अंजाम तक ले जाना दुनिया का सबसे कठिन काम है। सिर्फ़ कहने भर से कहाँ कुछContinue reading

Fark Padta Hai | Mid Night Diary | Aman Singh | #BenaamKhat
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फर्क पड़ता है | अमन सिंह | #बेनामख़त

‘फ़र्क नहीं पड़ता है’ कहने से कितना फ़र्क पड़ता है, कभी सोचा है तुमने? हर रात जब बातों को टालकर तुम यूँ ही सोने चली जाती हो, तो कभी सोचा है तुमने या जानने कीContinue reading

Lag Ja Gale | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat

लग जा गले | अमन सिंह | #बेनामख़त

तुमने जब भी मुझे गले लगाना चाहा है, मैंने तुम्हारी बाहों में खुद को सौपने से पहले अपने हाथ खोलकर तुम्हें अपने सीने में छुपा लिया। मैं ऐसा सिर्फ इसलिये ही नहीं करता कि तुम्हारेContinue reading

Ek Shaam | Mid Night Diary | Aman Singh | The Last Meeting
Benaam Khat

एक शाम | अमन सिंह | आखरी मुलाक़ात

याद है तुम्हें, कुछ हफ्तों पहले.. शाम के वक़्त साथ बैठे हुये, तुमनें मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया था और मैं बिना एक लफ्ज़ कहे, आँखों के अश्क़ों से कितना कुछ कह गयाContinue reading

Benaam Khat

तोहफा | अमन सिंह | दिवाली – अ गिफ्ट ऑफ़ लव | #बेनामख़त

पिछले कई हफ्ते सिर्फ इसी जद्दोजहद में गुजार दिये कि आखिर तुम्हें तोहफ़े में क्या दूँ? देने को ऐसे ही कुछ भी कैसे दे दूं? तुम्हें बस यूँही कुछ खास या बेहद खास नहीं देनाContinue reading

Benaam Khat, Love

कातिल | वैदेही शर्मा

तुम्हारी आँखों की चमक से मेरा राबता उतना ही गहरा है, जितना हमारे दरमियान बैठे हुए इस सन्नाटे का है। हमारे दफ़न हो चुके जज़्बातों के साथ ठीक वैसे ही जैसे इसे किसी सख़्त चीख़Continue reading

Ujjhan 'Stress' | Mid Night Diary | Aman Singh
Benaam Khat, Love, Micro Tales

उलझन | अमन सिंह | #बेनामख़त

बस यह समझ लो कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूँ? हसूँ, मुस्कुराऊँ, रोऊँ या चिल्लाऊँ… कोई तकलीफ़ होती तो कहता, कोई दुःख होता तो ज़ाहिर करता लेकिन इस उलझन का क्याContinue reading

Moujoodgi | Mid Night Diary | Vaidehi sharma
Benaam Khat, Love, Micro Tales

मौजूदगी | वैदेही शर्मा

हाँ, यहाँ अब भी सब कुछ है। ठीक वैसा ही जैसा तुम छोड़ गए थे। अगर कुछ तब्दील हुआ तो महज़ वो रात की दिन में तब्दीली और फिर उस दिन की रात में… ऐसाContinue reading

Benaam Khat, Micro Tales

मनमर्ज़ियाँ | अमन सिंह

पहले मैं कुछ और सोच रहा था, लेकिन अब कुछ और सोच रहा हूँ.. पर यह सोचना भी कितना मुश्किल है कि ऐसा क्या सोच रहा हूँ कि जिसके लिए इतना सोचना पड़ रहा है।Continue reading

Tumhari Aankhein
Benaam Khat, Love, Micro Tales, Short Stories

तुम्हारी आँखें | अमन सिंह | #बेनामख़त

बातें करना कोई तुमसे सीखे, कुछ न कहकर भी कितना कुछ बोल जाती हो तुम। हर बात को लफ़्ज़ों में कहा जाये ये जरूरी नहीं, और हर बात को शब्दों से बाँध कर कागज़ परContinue reading