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Poetry

Insaaf | Arvindra Rahul

ये नाम आंखें ,मुरछाया चेहरा। झुकी कमर और दुःख का पहरा। देख रहे हो … ये हरिया हे। कचहरी के रोज दो चार चक्कर लगता हे। पहले अपने बाप के साथ आता था। आज अपनेContinue reading