Tag: Anupama verma

Wo Sirf Chhaye Saal Ki Bacchi Thi Yar | Mid Night Diary | Anupama verma
Poetry, Uncategorized

वो सिर्फ छह साल की बच्ची थी यार | अनुपमा वर्मा

बहोत मुश्किल था पर मन बना लिया था अब नही लिखूंगी। लेकिन कल शाम जब मैने गांव मे कदम रखा तो देखा.. गांव की सारी औरते मिलकर एक औरत को बुरी तरह मार रही थीContinue reading

Kanha Tune Preet Sikhai | Mid Night Diary | Anupama verma
Poetry

कान्हा तूने प्रीत सिखाई | अनुपमा वर्मा

नीरस लगता था हर एक क्षण नाउम्मीद था हर एक कल शून्य था मै स्वयं मे अब तक तूने पूर्णता की ज्योत जगाई मन को मेरे दिशा दिखाई कान्हा तूने प्रीत सिखाई जग की रोशनीContinue reading

Adrashya Ghar | Mid Night Diary | Anupama Verma | #UnlockTheEmotion
Poetry

अदृश्य घर | अनुपमा वर्मा | #अनलॉकदइमोशन

जो होता नही हकीकत मे वो भी नजर आ जाता है तुम्हे देखते ही खुद-ब-खुद एक अदृश्य घर बन जाता है ना सीमेंट ना ईटे ना और कोई सामान लगता है लेकिन फिर भी घरContinue reading

Maa | Mid Night Diary | Anupama Verma | #UnlockTheEmotion
Poetry

माँ | अनुपमा वर्मा | #अनलॉकदइमोशन

जब हमे बोलना नही आता था, तो भी तू समझ जाती थी आज तू बोलती है तो हम कहते है “समझ नही आती” सौ सौ बार बोलकर, तूने बोलना सिखाया आज तुझे दूसरी बार भीContinue reading

Swabhavik Pyaar | Mid Night Diary | Anupama Verma | Love Poetry
Love, Poetry

स्वाभाविक प्यार | अनुपमा वर्मा | लव पोएट्री

खास नही है प्यार मेरा जो कल आम हो जाएगा स्वाभाविक है मेरा प्यार खुदा भी ना बदल पाएगा जो गर तू समक्ष है मेरे तो मै कृतज्ञ होती हूँ वेदना से मक्ति तुझसे मिलकरContinue reading

Poetry

अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना है | अनुपमा वर्मा

स्वार्थ सिद्धि कर रहा धरा पर व्यर्थ बोझ तू स्वयं से आगे बढकर देख आएगा स्वयं के फिर करीब तू जब तलक प्राण शेष है कर दूसरो पर निसार तू अन्यथा व्यर्थ तेरा जीना हैContinue reading

Short Stories

काश! मम्मी पापा मॉडर्न होते | अनुपमा वर्मा

काश मम्मी पापा माडर्न होते, ज्यादा नही बस इतने ही कि वो हर दिन झगडा करने के वक्त मेरे कान मे रूई डाल कर उन्हे बंद करने का रिवाज अपना लेते। पर ऐसा नही हैContinue reading

Baarish | Mid Night Diary | Anupama verma
Love, Poetry

बारिश | अनुपमा वर्मा

धरती पर आज फिर, बूंदो की चादर बिछी मोहब्बत बेहिसाब है, कि नजर हटती ही नही बूंदो की फुहार से, धरती को फिर राहत मिली हमे मिली ना राहत, पर उम्मीद तो मिल ही गयीContinue reading