Tag: Amrit

Jana | Mid Night Diay | Amrit
Poetry

जाना | अमृत

“जाना”, ये शब्द कभी भी सुखदायी नही हुआ न, बचपन की लट्टू की सुतली से जब, उंगलियां निकाल, उनमे चॉक फँसा कर स्कूल “जाना” हुआ, लगा जैसे किसी वृद्ध को वृद्धाश्रम भेज दिया हो, उनकेContinue reading

Punar Janam | Mid Night Diary | Amrit | IshqDaari
Poetry

पुनर जन्म | अमृत | इश्क़दारी

गड्ढे से काम नही चलेगा, कुआँ खोदो, और उसमें गाड़ दो। नंगी आग पर, नंगा ही लिटा दो, और ठूँस दो मुँह में, उल्टी, धुआँ उगलती चिमनी। पेड़ से लटकाओगे फंदे में, तो जमीन तकContinue reading

Main Tha Tum Thi | Mid Night Diary | Amrit
Poetry

मैं था तुम थी | अमृत

छटाँक भर लम्हो की दूरी पे, तुम थी, मुट्ठी भर कदमों की गिनती पे, मैं था, दूरियाँ बढ़ती गयी, लम्हे घटते गए, कदम चले, मुठ्ठियाँ बड़ी होती गयी। सफर की लहरों पे, तुम थी, रास्तेContinue reading

Good Bye | Mid Night Diary | Amrit Raj
Love, Short Stories

गुड बाई! | अमृत

लैपटॉप बैग ले लिया, मोबाइल को जेब मे डाल लिया, जूते पहने, हमेशा की तरह फीते खुले ही थे! मैं बस निकलने को ही था, कि ध्यान आया, वपास जा शर्ट चेंज की और कालीContinue reading

Love, Short Stories

बेजान रिश्ता | अमृत

“तुम्हे देख कर यूँ लगता है..जैसे वक़्त में सफर कर रही हूँ..सादिया फिर से लौट आई हैं..” “वक़्त..ये वक़्त का ही तो सफर है जो आज हम यूँ..अजनबियों की तरह मिले है..” “तुम्हारी आँखें अबContinue reading