Tag: Abhishek yadav

Poetry

कलम | अभिषेक यादव

मैं लिख रहा हूँ, क्या लिख रहा हूँ, नहीं पता। क्यूँ लिख रहा हूँ ,नहीं पता, कागज पर, कॉपी पर या दीवारों पर लिख रहा हूँ, नहीं पता। कहाँ लिख रहा हूँ ,नहीं पता, मैंContinue reading

Paristhiti Aur Swabhav | Mid Night Diary | Abhishek Yadav
Poetry

परिस्थिति और स्वाभाव | अभिषेक यादव

क्यूँ शांत हो तुम, मजे की बात है हँसते क्यूँ नही, क्या छिपा है तुम्हारे भीतर बतलाते क्यूँ नहीं । क्या बतलाऊँ मैं… शायद हमने खुद में हँसना,गाना,रोना सीख लिया है, शायद इन्हें चेहरे परContinue reading

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दृण संकल्प | अभिषेक यादव | माय प्राइड इंडिया

डगर-डगर पर पहर-पहर में हम मिलते हैं नए लोगों से, मिलते हैं नए लोगों से और नए-नए विचारों से, हमने उनसे कुछ सीख लिया और अपना जीवन देख लिया, अब बारी है हमारी कुछ करContinue reading