Tag: Aakash Shukla

तुम्हारी डायरी
Micro Tales

तुम्हारी डायरी | आकाश शुक्ला | अस्तित्व

मुझसे बेहतर कौन समझेगा स्मृतियों को, लेकिन तुम्हे भी तो समझना था ! समझना था कि जब कोई एक स्मृति हम पर हावी होती है तो समस्त स्मृतियों को निगलने लगती, अपाहिज बनाने लगती. तुम्हारी नContinue reading

लेकिन तब तक...
Love, Short Stories

लेकिन तब तक | आकाश शुक्ला | अस्तित्व

तुम्हारे साथ यहाँ, इस बहती नदी के पुल पर बैठ कर सूरज को खुले आसमां में अपने पंख खोलते देखना चाहती थी, लेकिन तुम्हारे बाद अब सिर्फ इसको बादल के समन्दर में डूबता हुआ देखनाContinue reading

Love, Short Stories

आँधियाँ घर नहीं बनाती | आकाश शुक्ला | अस्तित्व

पिछली बार जब वो आयी तो ठान के आयी थी कि उजाड़ के रख देना है सब कुछ,एक ही झटके में !! ये बात तुम क्यों नही मानना चाहते ? कितनी बार समझाया तुम्हे लेकिनContinue reading