Tab Main Aazaad Kehlaau | Mid Night Diary | Gaurav Singh | #UnlockTheEmotion

तब मैं आज़ाद कहलाऊँ | गौरव सिंह | #अनलॉकदइमोशन

फिर उठी आजादी की बात,
हमने भी कह दिया हम आज़ाद है।

जब नज़र पड़ी उन हाथो पर,
उठाये थे बोझ कच्ची उम्र में,
“क्या ये आज़ाद कहलाये है?”

जब नज़र पड़ी उस तराज़ू पर,
तौला था काबिलियत को रिश्वत के एवज़ में,
“क्या ये काबिल आज़ाद कहलाये है?”

जब नज़र पड़ी उस महिला पर,
ख़ौफ़ से बढ़ रही थी जो राह में,
“क्या ये आज़ाद कहलाई है?”

गर आज़ाद होकर चल सके ये दो कदम सुकूँ से,
गर आज़ाद हो इंसा भ्रस्टाचारिओ से,
गर आज़ाद हो इंसा आतंकवादियो से,
तब मैं आज़ाद कहलाऊँ!
तब मैं आज़ाद कहलाऊँ!

 

-गौरव सिंह 

 

Gaurav Singh
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