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स्वाभाविक प्यार | अनुपमा वर्मा | लव पोएट्री

खास नही है प्यार मेरा
जो कल आम हो जाएगा
स्वाभाविक है मेरा प्यार
खुदा भी ना बदल पाएगा

जो गर तू समक्ष है मेरे
तो मै कृतज्ञ होती हूँ
वेदना से मक्ति
तुझसे मिलकर ही पाती हूँ

तेरी चोट पर हर आंसू
मेरी आँखो से बहता है
तार जैसे वीणा के
कोई टुटने पर गाता है

मौन ही हम दोनो अपनी
कहानी जी रहे है
लोगो की नजर मे अजनबी
हम रूहानी रिश्ते मे जुडे है

हवा की वो आहट
जिसमे से तू है गुजरता
उस वक्त फिजाओ मे मैने
जादू देखा है तैरता

आसमां सा मेरा साया
हर पल तू मुझमे मौजूद है
मै लिखूं तो ये असर
मेरी कलम मे भी दिखता है

हाँ तू है जहां मेरा
मै तेरा आजाद परिंदा
बस इतना ही है क्षितिज हमारा

 

-अनुपमा वर्मा 

 

Anupama verma
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