Suna To Nahi | Mid Night Diary | Mihir Pandey

सुना तो नहीं | मिहिर पांडेय

“ देश में घोटाले करने का तरीका भी बदल जाता है, जब कोई देश बदल रहा होता है। मतलब यह है कि घोटाले का प्रारूप अब पहले से बेहतर और साफ़ – सुथरी दिखने लगा है”

क्या कहा ?
भ्रष्टाचार !
और वह भारत में..
कहीं सुना तो नहीं..
पर! हाँ कल देखा तो था,
क्लर्क कुछ लेने के
लिए टेबल के नीचे काफी देर झुका तो था,
पर ये तो भ्रष्टाचार नहीं…
इसे तो दस्तूर कहते हैं?

क्या कहा ?
ढोंगी नेता !
और वह भी भारत में…
कहीं सुना तो नहीं..
पर उस दिन देखा तो था…
चुनाव जीत कर गया तो .. किस बेशर्मी से जनता से मुँह फेर तो रहा था… पर यह तो ढोंग नहीं इसे तो राजनीति की पुरानी दाँव- पेंच कहते हैं!

क्या कहा ?
रिश्वतखोरी.!
और वह भी भारत में ?
सुना तो नहीं..
पर हाँ !..
कल देखा तो था…
अफसर, यूवक से भीख माँग रहा था….
पर यह रिश्वतखोरी तो नहीं…
इसे तो यजमानी प्रथा कहते है..।

 

-मिहिर पाण्डेय

 

Mihir Pandey
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