valentinesday

शायद | अमन सिंह | #बेनामख़त

 

अगर यह कहूँ कि मुझे नहीं याद कि वह दिन कौन सा था, जब तुमने कुछ ख़ास दोस्तों के नाम के साथ मेरा नाम भी शामिल किया था, तो यह बिल्कुल ही गलत होगा। हो सकता है, शायद तुम इस बात को भूल गयी हो क्यों कि तुमने खुद यह भी तो कहा था कि पूरे दिन तुम बहुत सी बातें कहती हो और तुम्हें नहीं याद रहता कि तुमने कब, क्या कहा था। यह पूरी बात सिर्फ एक शायद पर ही तो टिकी है कि शायद तुम भूल गयी, तुम्हारे खुद के कहे अल्फाजों को या शायद नहीं… लेकिन मैं इस बात को नहीं भुला सकता और मैं यह भी नहीं कहूँगा कि इस बात को मैं मरते दम तक याद रखूँगा क्यों कि जो लोग ऐसा कहते हैं वो झूठ बोलते हैं।

मेरे कई दोस्त कहते हैं कि तुम आँखों में आँखें डालकर झूठ बोल सकते हो, लेकिन ऐसी बात कहने की जरूरत ही क्या? खुद जिस बात की उम्र छोटी हो। मुझे नहीं याद है कि वह कौन सी बात थी जिसको सुनने के बाद तुम मुझे पहेली समझ बैठी। कितने इत्तेफ़ाक की बात है न जिस बात के चलते तुमने मुझे पहेली समझा, वह बात आज तलक मेरे लिए पहेली है। हाँ, अब यह बात सिर्फ बात नहीं रही, एक सवाल बन गयी है जिसका जवाब अगर तुम खुद दो तो अच्छा लगेगा। खैर, यह सब तो अलग बात हैं पर जो असल बात है, वह है… यारी की, दोस्ती की..

किसी से दोस्ती करना और किसी का दोस्त हो जाना दोनों ही अलग बातें हैं। किसी से दोस्ती करना बेहद ही आसान है लेकिन किसी का दोस्त बनना बहुत कठिन है और इस बात की समझ भी तो मुझे तुम्हारी बातों से ही तो मिली थी। मैं इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखता कि मैं थोड़ा बावरा सा, पागल सा हूँ… या फिर झल्ला… हाँ, कुछ सालों पहले किसी दोस्त ने ही यह नाम दिया था, मुझे… ‘झल्ला’। मैं यह नही कहूँगा कि मैं दिल का अच्छा हूँ और न ही मैं खुद की कोई तारीफ़ करूँगा क्यों कि अगर ऐसा नहीं होता, तो शायद तुमने मुझे दोस्त नहीं कहा होता और जितना भी मैंने तुम्हें जाना है, मैं यह बात यकीन के साथ कह सकता हूँ कि तुम्हारे फैसले गलत नहीं हो सकते।

वैसे प्यार के इस दिन मेरी दोस्ती की इन बातों को शायद कुछ लोग बे-मतलब सा कहें पर मेरा मानना है कि अगर दोस्ती न होती तो प्यार की कीमत नहीं होती क्यों कि ‘यार’ के बिना प्यार सिर्फ एक आधा अक्षर भर ही है और कुछ भी नहीं।   

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27 thoughts on “शायद | अमन सिंह | #बेनामख़त

  1. touching …. Pretty well combo of emotion and vocabs… Engaging in content…#MND Rocks..this time too .. 😀

  2. खूबसूरत ….ये उस दौर की दोस्ती की कहानी महसूस हो रही है जब आप टीन ऐज में नहीं है थोड़े समझदार थोड़े बावले और शर्मीले
    किसी ने प्यार से कुछ पुकारा तो वो मिश्री के माफिक कानो नें शहद सा घुल जाये । बहुत सुंदर आओ लिखते रहे मैं पढता रहूं शायद या बहाने बरसों बाद मेरी कलम में स्याही भर जाये कुछ लिखने कैब

  3. आपने कहानी को शब्दों में यूँ पिरोया है मानो एहसासों का सैलाब कलम में से कोई गाढ़ी स्याही की भांति किसी कोरे कागज पर उतर रहा हो, थोड़ा धीरे, पर गहरा असर छोड़ देने वाला।
    “जिस बात के चलते तुमने मुझे पहेली समझा, वो आज तक मेरे लिए पहेली है”, और “बिना यार के प्यार एक आधा अक्षर मात्र ही तो है”
    ये दो पंक्तियां पाठक के दिल में बस जाती हैं”

  4. इन अल्फ़ाज़ों ने जज़्बातों को क्या खूब समेटा है….
    पढ़ कर बस यूं लगा कि कोई अपना यादों के साये में लेटा है…

    Keep it up aman singh…
    May god bless u…

  5. ये अल्फाज़ जज़्बातों को कुछ यूं समेटे हैं…
    जैसे हम किसी अपने की यादों के साये में लेटे हैं…
    Keep it up aman singh..
    May god bless you..

  6. Yes, what I as an author agree..
    All relationship which has friend-ship in it goes a long way. Be it friends, husband wife, brother sister, girlfriend bf, still mom daughter, or mom n son inlaw etc .
    Very well emoted..must hv felt it aman b4 writing ….kuddos

  7. Ab tk ka best h ye…m use record krna chahti hu..apka approval chaiye…jga zyada kch ho khne ko..wha chup rhna chaiye q ki khamoshiya bolti h…iske lye shbd nhi h mere pas…ue dil ko chhua h…I ishq it

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