शायद प्यार | कुमार जीतेन्द्र

कुछ तो होगा तुझसे राबता (ज़ारा)
वरना
यू देख के चेहरा तेरा
मैं मुस्कुरा गया कैसे ?

कुछ तो तपिश रही होगी
आँखों में तेरे बरना
जाने पर मेरे
आँखों में आंशु तेरे रह गया कैसे ?

या रही हो मुहब्बत पिछली
बरना आने पर मेरे चेहरा ये खिल गया कैसे  ?

कुछ तो लिखा होगा हथेली पर
तेरे
मेरे नाम के जैसा !!
वरना
देख के यू मुझे हाथो को छिपा लिया कैसे ?

कुछ तो दिखा होगा ख़्वाब में
कुछ मेरे जैसा
वरना !!
नींद में यू नाम मेरा गुनगुना लिया कैसे ?

छिपा के तो रखा होगा एक ख़्वाब तूने भी
वरना
मोहब्बत सुन के मेरी चेहरा तूने  झुका लिया कैसे ?

कोई कशिश तो रही होगी बाक़ी
वरना
देखने को चेहरा ये
मीलों दूर चल के तू आ गया कैसे ?

थोड़ी हाथो में नरमाई मेरी भी रही होगी
वरना
हाथो में यू हाथ तेरा समा गया कैसे ?

कुछ तो वास्ता होगा तेरा मुझ से
वरना
इतनी रात को तेरा ख़्वाब आ गया कैसे ?

मोहब्बत होगी तू मेरी
वरना
तेरा एक ख़्वाब नींद चुरा गया कैसे ?

 

-कुमार जितेंद्र

 

Kumar Jitendra
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