सब याद है मुझे | अमित तिवारी

सब याद है मुझे ,
फ़िराक में तो हर कोई था तुम्हे पाने की ,
पर तुम्हें पाने की फ़िराक हमको न थी
थी तो बस कद्र तुम्हारे इस झुंझलाहट की
जो मेरी गलतियों पे तुमको आती थी,

सब याद है मुझे
हम भी गलतियां करते जाते थे
तुम्हारे इस नाराज़गी को देखने के लिए
सकूँ मिलता था बस यूँ ही !

सब याद है मुझे
मेरे न दिखने पर तुम्हारी नज़रे
मुझे ढूढने की कोशिश करती
उस दिन रोई भी थी तुम मेरे लिए
वो भी क्यूँ , कि मुझे तेज़ बुखार होने पर भी
तुमसे मिलने आया,

सब याद है मुझे !
पर आज बुखार भी है , फ़िराक़ भी अब गलतियाँ भी नही करता तुम्हें नाराज़ करने वाली और हाँ

तुमको आज मेरी नज़रें ढूढती है कही दिखो हमें ,
उस गहरे नीले सूट और सितारों वाले दुपट्टे में !

 

-अमित तिवारी

 

Amit Tiwari
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