Sab Humein Kabool Hai | Mid Night Diary | Ashwani Singh

Sab Humein Kabool Hai | Ashwani Singh

वो खिज़ा में झड़ते पत्ते
वो नदी का सूखा जाना

वो जन्नत तक जाते रश्ते
वो साखों का झुक जाना

सब हमे क़ुबूल हैं

वो इश्क़ के तामीर छत्ते
वो परिंदे का वापस आना

वो काँधे में यादों के बस्ते
वो मंज़िल का मुकर जाना

सब हमे क़ुबूल हैं

वो सुकून के साथी फ़रिश्ते
वो नींदों को ख़्वाब का फुसलाना

वो अंगारों से दहकते रिश्ते
वो आंसुओं से शोले बुझाना

सब हमे क़ुबूल हैं

 

-अश्विनी सिंह

 

 

Ashwani Singh
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