सांसें चलती नहीं | भाविक जैन | #अनलॉकदइमोशन

वो शराब कही बिकती नहीं
जिसमें तेरा नशा हो वो कही बनती नहीं
कैसे जियु अब तेरे बिना
जब तक एक घूंठ तेरा, गले से न उतरे मेरी सांसें चलती नहीं

हाथ तड़प रहे है तुझे छुनेको
आँखें तरस के ढूंढ रही तुझे घूरने को.
गली के हर शराब खाने में हो आया.
लेकिन धक्का मारके निकल दिया कहके.ये तोह पहले से ही पी आया

तुझे जाना था तोह चली जाती
मेरी बातें नहीं मांनी थी तोह नहीं मानती.
यु अचानक गायब होना क्या जरुरी था
कम्भकत जीने के लिए अपने नाम की एक शीशी तोह छोड़ जाती

 

 

-भाविक जैन 

 

Bhavik Jain
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