Roop Tumhari | Mid Night Diary | Roshan 'Suman' Mishra

Roop Tumhaari

घनी अंधेरी रातों में वो,
दिखती पुनम सी प्यारी।
जुल्फ घनेरी लट उलझे हैं,
मेघ घनाघन सी कारी।

माथे बिंदिया चमक रही है,
उगते सूरज सी लाली।
होंठों पर कपकपी टिकी है,
छलकत जाम की हो प्याली।

नरम हथेली सजी हिना है,
मणि आभूषण की थाली।
चाल है उनकी लचक मटक कर,
झूलती सरसों की डाली।

नजरें झुकती उठती उन पर,
शरम लाज सब को टाली।
रूप है उनकी मृगनैनी सी,
चाँद भी धूमिल कर डाली।

तेरे बिना हर सांस अधूरी,
तन खाली और मन खाली।
दांव अधूरी खेल अधूरा,
जीती सब बाजी हारी।

 

-रौशन मिश्रा “सुमन”

 

Roshan 'Suman' Mishra
Roshan ‘Suman’ Mishra
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