RaktBeez | Mid Night Diary | Ashwani Singh

रक्तबीज | अश्वनी सिंह

मैं हवा का दम रखता हूँ
शूल कुचलता जाऊँगा
काली का मुझमे भेष हैं
रक्तबीज निगलता जाऊँगा

त्रिशूल सा हूँ तेज मैं
मैं क्रोध का भण्डार हूँ
हिमालय मुझे हैं लांघना
मैं अग्नि का श्रृंगार हूँ

रौद्र,भय, वीभत्स मैं
मैं सूर्य का प्रताप हूँ
शंकर की मैं उपासना
मैं जलता हुआ अँगार हूँ

मैं हवा का दम रखता हूँ
शूल कुचलता जाऊँगा
काली का मुझमे भेष हैं
रक्तबीज निगलता जाऊँगा

 

-अश्विनी सिंह

 

Ashwani Singh
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