Raksha Bandhan | Mid Night Diary | Aman Singh | अमन सिंह

रक्षा बंधन | अमन सिंह | भाई बहन का प्यार

“अरे मेरी राखी के पैसे?”

“पैसे कैसे पैसे? मिठाई और राखी तो पापा के पैसों से आई है फिर किस बात के पैसे” मैंने तुम्हारी बात का जवाब देते हुए कहा तो तुम मेरी शिकायत लेकर माँ के पास चली गयी। तुमसे बड़ा हूँ लेकिन तुम्हे परेशान करने में बहुत मजा आता है। तुम माँ से मेरे खिलाफ दलीले पेश करती रही और मैं, अपने दोस्तों के साथ घूमने निकल गया। शाम को लौटकर आया तो पता कि तुम अभी भी मुझसे नाराज़ हो। मैं चुपचाप तुम्हारे कमरे में आया तो देखा तुम मुँह फुलाकर बैठी हो।

“अरे मेरा डोलू गुस्सा क्यों है?” मैं कहते हुए तुम्हारे पास बैठा लेकिन तुमने मुँह फेर लिया। “अरे बाप से इतना सारा गुस्सा” मैं थोड़ी देर चुप रहा और फिर बोला, “वैसे लगता है किसी ने अपना स्कूल बैग नही चेक किया है।”

तुम मेरी बात सुन कर उठीं और अपना स्कूल बैग चेक करने लगी। “अरे बार्बी डॉल, ये तो वही बार्बी डॉल है जो उस दिन पापा ने लेने से मना कर दी थी।” तुम्हारी आवाज चहक़ उठी। तुम करीब आकर मेरे सीने से लग गयी।

“अरे भोलू से डोलू गुस्सा नहीं है बस थोड़ी सी नाराज़ थी।” तुम्हारी बात सुनकर हंसी आ गयी, मुझे। वैसे अगर तुम्हरे हाथ की बनी मिठाई और मिल जाती तो…. इतना ही कहा मैंने की तुम प्लेट भरकर मिठाई ले आई और मुझे खुद ही खिलने लगी। उस पल दिल में बस एक ही ख्याल आया की ये डोलू और भोलू का प्यार ऐसे ही बना रहे। अभी तुम्हारा खत मिला तो याद आया कि राखी का त्यौहार है। जिसे बीते हुए ३ दिन हो चुके हैं। खत के जरिये भेजी गयी तुम्हारी राखी देख आँखों में यादों के जुगनू आ गए। तुमने लिखा है ‘जानती हूँ व्यस्त रहते हो, इस बार नहीं तो न सही पर अगली बार जरूर आना….’ तुम्हारी बातें पढ़कर बचपन के वो दिन याद आते थे जब हमारे हिस्से में सिर्फ और सिर्फ फुर्सत हुआ करती थी। कैसे हर एक त्यौहार का बेसब्री से इन्तजार रहता था। खास कर राखी का…

मुझे तो आज भी याद है राखी का वो दिन जब पहली बार तुम्हे तोहफे में तुम्हारी मनपसंद घडी दी थी मैंने। पहली बार कुछ खरीद पाया था मैं, तुम्हारे लिए अपने कमाए पैसों से.. कितनी खुश हुई थी तुम, साथ ही तुम्हारी आँखें भी भर आई थीं। स्कूल, घर, मोहल्ले में कैसे चहक चहक कर तुमने सबको बताया था कि ‘देखो ये घड़ी मेरे भैया ने दी है’। तुम्हे खुश देखकर मुझे अच्छा लगा था। लेकिन अब तुम कैसे अपने हर गम को छुपाकर मुझसे हँसकर बात करती हो, मैं समझता हूँ तुम्हारे दिल की बात लेकिन क्या करूँ मैं भी मजबूर हूँ। कितनी ही कोशिशें की लेकिन वक़्त है कि मिलता ही नहीं है। आज तुम्हारी हर ख्वाहिश को पूरा करने की हिम्मत रखता हूँ, बस पास नहीं है तो वह है वक़्त, वादा तो नहीं करता लेकिन कोशिश जरूर करूँगा अगली बार आने की।

-अमन सिंह

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