प्रपोजल प्रेजेंटेशन | अनुभव कुश | अ लवस्टोरी फ्रॉम स्कूल डेज

मैंने कदम बढ़ाया………कदम बढ़ाते ही मैं एक नीले रंग के चैनल को पार कर चुका था। एक बेचैनी थी मन में, होती भी क्यूं ना आखिर स्कूल के अलावा किसी इंस्टिट्यूट में पहली बार गया था। 12th के एग्ज़ाम देने के बाद जो छुट्टियां बच रही थी उसको सही से इस्तेमाल करने के लिए पापा ने मेरा एडमिशन एक शॉर्ट टर्म कंप्यूटर डिप्लोमा के लिए करवा दिया था।

खैर…. मैं अब क्लास के सामने था। क्योंकि मैं टाइम से पहले पहुंच गया था और और अभी पहले वाली क्लास ही नहीं खत्म हुई थी। तो मुझे क्लास के बाहर पड़ी लकड़ी की टेबल पर बैठ कर इंतजार करने को बोला गया।

6 मिनट के बहुत ज्यादा लंबे इंतजार के बाद क्लास खाली हुई। क्लास में पहुंचने वाला मेरे अलावा मेरे साथ का और कोई भी नहीं था। मैं वहां बीच वाली लाइन की सबसे आगे वाली कुर्सी पर बैठ गया। मेरे वहां बैठे हुए मुश्किल से 2 या 3 सेकंड ही हुए होंगे कि और बच्चों का आना शुरू हो चुका था और अगले ही कुछ मिनटों में टीचर भी क्लास में आ चुकी थी। जैसे कि हर क्लास के शुरुआत में होता है पहले दिन यहां भी बिल्कुल वैसा ही हुआ।

मैम ने सबका नाम पूछना शुरू किया। पहली लाइन के दो बच्चों के बाद अब मेरी बारी थी। मैं खड़ा हुआ …….”गुड मॉर्निंग मैम माय ने”। इतना ही बोला था मैंने के सन्नाटे को चीरते हुए……तेजी से दौड़ते हुए एक लड़की अंदर आई ….. (दोस्तों रुकिए ये वो लड़की नहीं है) उसके पीछे से जोर से चीखते हुए अपनी फ्रेंड को खींचते हुए वो अंदर अाई और बिल्कुल मेरे बगल वाली सीट पर बैठ गई। मेरी दिल की धड़कन लोकल पैसेंजर से राजधानी एक्सप्रेस में तब्दील हो गई थी।

मैं अपने बारे में बता दूं….. मैंने अपनी 12th क्लास तक की पढ़ाई में किसी भी लड़की को आज तक हेलो भी नहीं बोला था और लाइन में अगर लड़की मेरे आगे खड़ी होती थी तो मैं लाइन से हट कर पीछे लग जाता था और अगर कोई लड़की रास्ते में मेरे सामने से आ रही होती थी तो मैं अपनी आंखें नीचे कर लेता था। बहुत शर्मीला था मैं और लड़कियों के मामले में तो मुझे बिल्कुल अनुभव नहीं था।

आपके पास पेन है क्या….. उसने पूछा

ब्लैक बोर्ड से आंखें हटा कर जैसे मैंने उसको देखा….. “Oh God…… She is so fair”….यही शब्द थे मेरे जो की मैने खुद को बोले थे…. पूरे 3 सेकंड लगे मुझे उसका चेहरा समझ पाने में।

आपके साथ भी कुछ ऐसा ही होता होगा अगर आप किसी अंधेरी जगह में हो और अचानक से आपके सामने बहुत ही तेज रोशनी आ जाए तो आप भी नहीं समझ पाएंगे कि यह क्या हुआ।

मैंने बोला….हां मेरे पास पेन है….
प्लीज मुझे दे दो…..उसने बोला

अगर मैंने पेन आपको दे दिया तो मैं कैसे लिखूंगा… मैनें बोला। उसको काफी समय लगा यह समझने में कि मैंने बहुत ही गंदा जोक मारा है। जब तक वो मेरी इस बात को समझ रही थी तब तक मैं उसे देखता रहा…. तीन… पूरे तीन…. तीन तिल थे उसके मुंह पर……. एक नीचे वाले होंठ के नीचे और दो माथे पर।

चलो सब लोग अपनी अटेंडेंस बोल दो……मैम बोली

सबसे पहले मेरा नाम था। और मैं इस इंतजार में था कि कब मैम उसका नाम बोलेगी और वो प्रेजेंट मैम बोलेगी क्योंकि अभी तक मुझे उसका नाम नहीं पता था।

नैना…… मैम बोली
प्रेजेंट मैम……. तो उसका नाम था नैना बिल्कुल उसकी शख्सियत को दर्शाता हुआ। हम लोग काफी अच्छे दोस्त बन चुके थे।

समय के साथ हमारी बातें और नज़दीकियां बढ़ती गई। शायद मैं अपनी मां और बुआ के बाद पहली बार किसी लड़की के इतना करीब आया था। कंप्यूटर लैब में भी हम दोनों हमेशा साथ बैठते थे। और जब मैम आती थी हम दोनों के पास नाम पूछने तो मैं उसके बोलने से पहले ही उसका नाम बता देता था…….मैम नैना और मेरा अनुभव….. एक पल को जब मैं यह दोनों नाम साथ लेता था तो मन ही मन मुस्कुरा देता था। मेरे ऐसा करने पर हर बार वो हल्का सा मुस्कुरा देती थी और मैं भी उसके जवाब में हंस देता था।

जनाब…! क्या बात है!…..बहुत खुश नजर आ रहे हो। उसके ऐसा बोलते ही मेरी आंखे उसको जवाब दे देती थी। मानो चीख चीख कर बता रही हो की हां कोई तो बात है हमारे बीच।

हमारी दोस्ती अब पेन एक्सचेंज करने वाले क्लासमेट से बेकरी शॉप पर पेटीज खाने वाले दोस्तों में बदल चुकी थी लेकिन मैं उसे कैसे बताता की कि यह रिश्ता मेरे लिए दोस्ती से बहुत आगे है। क्लास तीन महीने की थी और बस खत्म ही होने वाली थी। जैसे जैसे लास्ट डेट पास आ रही वैसे वैसे मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी।

क्लास में आज पावर प्वाइंट प्रेज़ेंटेशन बनाना सिखाया जा रहा था। तभी मैम ने मझसे पूछा “अनुभव tell me the uses of powerpoint presentation”
“Mam, PowerPoint is used to present documents, performed calculations, analysed data and reports in slideshows” जो कुछ सामने ब्लैकबोर्ड पर लिखा था मैने वैसा ही मैम को पढ़ कर सुना दिया था।

हां…… प्रेज़ेंटेशन……मै प्रेज़ेंटेशन बना कर उसको बता सकता हूं जो में उसके लिए सोचता हूं।

घर आकर मैनें एक प्रेज़ेंटेशन बनाई। सब कुछ लिखा मैने उसमें की आगे कभी भी मैं उसे इंग्लिश में कोई दिक्कत नहीं होने दूंगा और जब भी तुम मेरे साथ होती हो तो मुझे वायलिन की आवाज़ आवाज़ सुनाई देने लगती है और एक बात लिखी मैनें की “अगर तुम मेरी ज़िन्दगी में नहीं भी अाई तो भी मै आंसू नहीं बहाऊंगा क्यूंकि आंसुओं के साथ मैनें बहुतों के नैनों से सपने बहते देखें हैं”। आखिरी स्लाइड पे मैने लिखा “do you love me?” मेरी प्रेज़ेंटेशन पूरी हो चुकी थी। बस अगले दिन जाकर मैने वो प्रेज़ेंटेशन एक पेनड्राइव में उसे दे दी और कहा इसमें तुम्हारे लिए कुछ खास है। आज भी नैना उतनी ही खूबसूरत लग रही थी जितनी पहली बार दिखने पर।

इंतजार करना था मुझे अगले दिन की क्लास का। कल आखिरी क्लास थी और कल की क्लास में ही मुझे पता चलने वाला था नैना का फैसला। एक दिन का इंतज़ार पूरा हुआ।

आज भी मैं समय से पहले ही पहुंच गया था। आज भी क्लास खाली नहीं हुई थी। आज फिर मुझे बाहर इंतजार करने को बोला गया। क्लास में जाने वाला आज भी मै पहला इंसान था। धीरे धीरे लोग आना शुरू हुए। मैम भी आ गई थी लेकिन नैना अभी तक नहीं अाई थी। हर आहट के साथ मुझे उसके आने एहसास होता था पर अब भी वो नहीं अाई थी। हर सेकंड के साथ मेरी बेचैनी बढ़ती जा रही थी पर वो अब तक नहीं अाई थी। कुछ देर बाद सन्नाटे को चीरती और तेज़ी से दौड़ती हुई एक लड़की अाई और मेरे पास आकर बोली “ये लो नैना ने दी है पेनड्राइव, वो आज नहीं आयेगी”। बस उस लड़की के वो शब्द आज भी मेरे कानों में गूंजते है।

आज तक मैने उसे नहीं देखा। ना कोई कॉल ना ही कोई मैसेज। जहां तक की वो अपना डिप्लोमा लेने भी नहीं अाई थी। पर मैने एक दिन जब पेनड्राइव अपने लैपटॉप में लगाई थी तो मेरी प्रेज़ेंटेशन की आखिरी स्लाइड में लिखा था “yes, i love you, but i can’t be yours”।

 

-अनुभव कुश

 

Anubhav Kush
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